IMG-20211009-WA0003-removebg-preview-1.png

मीठा किसे पसंद नहीं है, हमारे रोजमर्रा की आवश्यकता में उपयोग की जाने वाली  शक्कर, गुड़, राब, मिश्री आदि जैसी कई चीज़ें है जिसका निर्माण गन्ना (Sugarcane) से होती है। हालांकि मिठास की प्राप्ति के लिए और भी कई फसल है जैसे- ताड़ , चुकंदर और मधु(शहद) लेकिन मुख्य रूप से गन्ने का ही उपयोग किया जाता है। गन्ना एक प्रमुख व्यावसायिक फसल है। इसे नकदी फसल भी कहा जाता है। हमारे देश में गन्ना की खेती (sugarcane farming) प्राचीन काल होती आ रही है। Top Quality Agro Chemicals

विश्व में चीनी उत्पादन में ब्राजील के बाद भारत का दूसरा स्थान है। गन्ने की खेती (sugarcane farming) से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। विषम परिस्थितियां भी गन्ना की फसल को बहुत अधिक प्रभावित नहीं कर पाती है। इन्हीं विशेष कारणों से गन्ना की खेती अपने-आप में सुरक्षित और लाभ की खेती मानी जाती है।

आप यह लेख GEEKEN CHEMICALS के द्वारा पढ़ रहें है।  GEEKEN CHEMICALS एक रासायनिक कीटनाशक बनाने वाली कंपनी है , जो किसानों के फसल में लगने वाले रोग, खरपतवार नियंत्रक , कीटनाशक आदि तरह के केमिकल्स का निर्माण करती है।  GEEKEN CHEMICALS भारत के किसानों की भरोसेमंद कंपनी में से एक है।  कई वर्षों से लगातार हमारी कंपनी भारत में सबसे अच्छी रासायनिक कीटनाशक बनाने वाली कंपनी का आवर्ड भी जीत चुकी है।

भारत में गन्ने की खेती वैदिक काल से होती चली आ रही है। गन्ने का व्यावसायिक उपयोग होता है। इसलिये गन्ने की आधुनिक खेती को व्यावसायिक खेती कहा जाता है। गन्ने की खेत से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। गन्ने की खेती के बारे में कहा जाता है कि यह सुरक्षित खेती है क्योंकि गन्ने की खेती को विषम परिस्थितियां बिलकुल प्रभावित नहीं कर पातीं हैं।

Contents

साल में  दो बार की जा सकती है गन्ने की खेती

भारत में गन्ने की फसल के लिए बुआई साल में दो बार की जा सकती है। इन दोनों फसलों को बसंतकालीन व शरदकालीन कहा जाता है। शरदकालीन  फसल के लिए गन्ने की बुआई 15 अक्टूबर तक की जाती हैजबकि बसंत कालीन गन्ने की फसल के लिए बुआई 15 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक की जाती है। बसंत कालीन गन्ने की आधुनिक खेती के लिए बुआई धान की पछैती फसल की कटाई के बाद, तोरिया, आलू व मटर की फसलों की कटाई के बाद खाली हुए खेतों में की जा सकती है।

गन्ने की आधुनिक खेती के लिए आवश्यक मिट्टी

pesticides company  in india

गन्ने की फसल के लिए सबसे अच्छी मिट्टी दोमट मिट्टी होती है। इसके अलावा गन्ने की खेती को भारी दोमट मिट्टी में अच्छी फसल ली जा सकती है। गन्ने की खेती क्षारीय,अमलीय, जलजमाव वाली जमीन में नहीं की जा सकती है।

किस प्रकार करें खेती की तैयारी

insecticide company in india

धान, आलू, मटर, आदि फसलों से खाली हुए खेत को मिट्टी पलटने वाले हल से तीन चार बार जुताई करनी चाहिये। पुरानी फसलों के अवशेष खरपतवार पूरी तरह से हटा देना चाहिये। बेहतर होगा कि हैरो से तीन बार जुताई करनी चाहिये। इसके बाद देशी हल से 5-6 बार जुताई करके खेत को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिये। किसान भाइयों को इसके बाद खेत का निरीक्षण करना चाहिये यदि खेत सूखा हो तो पलेवा करना चाहिये। यह देखना चाहिये कि गन्ने की बुआई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिये।

गन्ने में खरपतवार नियंत्रक 

गन्ना फसल में खरपतवार प्रबन्धन आवश्यक है, क्योंकि पंक्ति में बोई गई अन्य कम अवधी की फसलों की अपेक्षा गन्ने में खरपतवार प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा होती है| गन्ना चौड़ी कतारें में बोया जाता है और शुरूआती वृद्धि बहुत धीमी गती से होती है| गन्ने में 200 से ज्यादा खरपतवार पाये जाते है, जिसमें 30 खरपतवार आर्थिक रूप से गन्ना फसल को हानी पहुँचाते है|

गन्ना फसल में मौजुद खरपतवार के प्रकार और प्रजाती संरचना में बदलाव देखा गया जो उपलब्ध जलवायु, भूमि प्रकार, फसल प्रणाली का अंगीकरण सस्य क्रिया तथा खरपतावार प्रबंधन पद्धति पर निर्भर करते है|

आज हम आपको बतायंगे की गन्ने के खरपतवार को कैसे नियंत्रित करें

top quality agro chemicals

गन्ने की फसल में कई तरह के खरपतवार पाए जाते हैं। जिनमे चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार, संकरी पत्ती वाले खरपतवार, मोथा कुल के खरपतवार एवं बेल वाले के खरपतवार शामिल हैं। बेल वाले खरपतवार गन्ने के तनों पर बढ़ने लगते हैं। जिससे गन्ने के पौधे झुकने लगते हैं और फसल की वृद्धि बाधा आती है। वसंतकालीन गन्ने की फसल में होने वाले कुछ प्रमुख खरपतवार इस प्रकार हैं :

चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार

पत्थरचटा, कनकवा, मकोय, हजारदाना, जंगली चौलाई, जंगली जूट, कालादाना, सफेद मुर्ग, गोखरू, अगेव

संकरी पत्ती वाले खरपतवार

दूबघास, कोदो, संवा, बनचरी, मकड़ा घास, मोथा

विभिन्न खरपतवारों पर कैसे करें नियंत्रण?

निराईगुड़ाई 

खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए निराईगुड़ाई सबसे बेहतर विकल्प है। इसमें लागत भी कम होती है और हानिकारक रसायनों का प्रयोग नहीं होने से मिट्टी एवं फसलों पर दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।

बुवाई के 30 दिनों बाद पहली निराई-गुड़ाई करें। बुवाई के 60 दिनों बाद दूसरी निराई-गुड़ाई करें एवं बुवाई के 90 दिनों बाद तीसरी बार निराई-गुड़ाई करें।

अंकुरण से पहले 

गन्ने की बुवाई के बाद एवं अंकुरण से पहले खरपतवारों पर नियंत्रण करने के लिए प्रति एकड़ खेत में 500 ग्राम एट्राजिन (Kenzin) 2,4,D 58% 500 ml(Bhasam) & Gee Metri 100 gm का प्रयोग करें।

गन्ने के कीड़ों और खरपतवार नष्ट करने के लिए क्या प्रयोग करें 

Herbicides Products in India

किसान भाइयों , हम देखते है कि जैसे – जैसे हमारी गन्ने की फसल बड़ी होने लगती है , उसमें कीड़ों – मकोड़ों का प्रकोप भी शुरू हो जाता है।  हम समझ नहीं पाते है कि इसके रोकथाम के लिए कौन सा केमिकल्स प्रयोग करें और गलत तरह की दवाई प्रयोग करने से हमारे फसल को नुकशान पहुँचती ही है, यह हमारे उपजाऊ जमींन को भी ख़राब कर देता है।  इसलिए अब हमारे किसान भाइयों , को घबरानें की जरुरत नहीं है क्योंकि आपका सच्चा साथी Geeken Chemicals India Limited आपके साथ है।

जीकेन केमिकल्स लेकर आया है Kenthrin (Bifenthrin 10% EC) और Bhasam (2-4-D Amine Salt 58% SLSelective Herbicide)जो कीड़ों और खरपतवार को जड़ से खत्म करें और दिलाये अत्यधिक पैदावार।  KENTHRIN Bifenthrin 10% Ec ब्रॉड स्पेक्ट्रम किटनाशक है। यह कीटनाशक कीटक के संपर्क में आते ही उसके स्टोमच पर असर करता है।  KENTHRIN Bifenthrin 10% EC सभी प्रकार के फसल मे पत्तो का रस चूसने और पत्तो को चबाने वाले कीटक को कंट्रोल करता है। वहीँ तेज़ाब खरपतवार की जड़ों तक जाकर उन्हें नष्ट करता है।

 निष्कर्ष 

हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इस पोस्ट में बताई गई दवाओं एवं अन्य उपायों को अपना कर आप गन्ने की फसल में आसानी से खरपतवारों पर नियंत्रण कर सकते हैं। अगर आपको यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसानों तक यह जानकारी पहुंच सके। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।