जानिए गन्ने की खेती में GEEKEN CHEMICALS का Keeban Super​(Chlorphyriphos 10% GR) कैसे करता है काम , छिड़काव की विधि 

गन्ना जिसका रस हम सभी बड़े चाव से पीते है।  गर्मी में अगर गन्ने का रस मिल जाये तो क्या बात है। आज के समय में किसान भाई गन्ने को परंपरागत तरीके से उगाते है, किन्तु वर्तमान समय में बाज़ारो में इसकी कई उन्नत क़िस्मे देखने को मिल जाती है, जिन्हे उगाकर किसान भाई अधिक पैदावार भी प्राप्त कर रहे है | यदि आप भी गन्ने की खेती कर अच्छी कमाई करना चाहते है, तो इस लेख में आपको गन्ने की खेती कैसे करे के बारे में जानकारी दी जा रही है |

 

आप यह लेख  Geeken Chemicals India Limited  की वेबसाइट पर पढ़ रहें है। GEEKEN CHEMICALS किसानों के फसल को ध्यान में रखकर अलग – अलग तरीके के कीटनाशक और फसल के उत्पाद सम्बन्धी रसायन काफी समय से बनाता आ रहा है। आप भी GEEKEN CHEMICALS का बना प्रोडक्ट अपनी फसल की प्रयोग कर सकतें।  क्योंकि GEEKEN भारत के किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद रसायन में से एक है।

कैसे करें गन्ने की खेती

गन्ने की खेती किसी भी तरह की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती है,किन्तु गहरी दोमट मिट्टी में इसकी पैदावार अधिक मात्रा में प्राप्त हो जाती है | इसकी खेती के लिए उचित जल निकासी वाली भूमि की आवश्यकता होती है | क्योकि जल भराव से फसल के ख़राब होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है | सामान्य P.H. मान वाली भूमि गन्ने की खेती के लिए उपयुक्त होती है | गन्ने की खेती हुई में जलवायु एवं मिट्टी का प्रमुख स्थान है। गन्ने की खेती हेतु गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है । मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच में होना चाहिए।

गन्ने की खेती हेतु गन्ने के पौधों में जो फल आते हैं। उनमें गांठों को नाइट्रोजन वातावरण से भी प्राप्त होती है। अतः हमें पोटाश और नाइट्रोजन का छिड़काव कम मात्रा में करना चाहिए इसी के साथ साथ गन्ने की खेती हेतु अच्छे तापमान की आवश्यकता होती है । अतः 25 डिग्री सेंटीग्रेड से कम तापमान पर गन्ने की खेती करना उपयुक्त नहीं है ।इससे अधिक तापमान पर ही गन्ने की खेती की जाए तो अच्छा होता है।सूखी चिकनी एवं बलुई मिट्टी गन्ने की खेती हेतु अधिक उपयुक्त मानी गई है।

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गन्ने में लगने वाले रोग एवं कीट

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किसान जब भी किसी फसल की बुवाई करता है तो, उसके दीमाक में बस एक चीज चलती है वह है रोग। कहीं किसी रोग या फिर कीटाणु की वजह से हमारी फसल ख़राब न हो जाएँ। आज हम उन किसान भाइयों को बताएंगे कि हमारे गन्ने में कौन – कौन से रोक पकड़ सकतें है।

·    दीमक

गन्ने के पौधों में दीमक का प्रभाव बीज रोपाई के बाद कभी भी दिखाई दे सकता है। इस रोग के कीट पौधे की जड़ों को काटकर उन्हें नुक्सान पहुँचाते हैं। जिससे पौधा मुरझाकर सुख जाता है। पौधों पर इसका प्रकोप रोपाई के वक्त अधिक दिखाई देता है। इससे प्रभावित गाठें अंकुरित ही नही हो पाते हैं।

·    उखेड़ा या उकठा रोग (विल्ट)

यह रोग गन्ने में फ्यूजेरियम नामक फफूंद से होता है। उत्तर भारत में इस रोग का प्रकोप भड़ता ही जा रहा है। यह रोग मृदा तथा बीज जनित हैं अथवा प्रसार होता है।  यह रोग जल भराव के कारण होता है।

·    सफ़ेद मक्खी

सफेद मक्खी का रोग पौधों की पत्तियों पर आक्रमण करता है | इस रोग का कीट पत्तियों की निचली सतह पर रहकर उसका पूरा रस चूस लेता है, जिससे पत्तिया पीली पढ़कर सूख जाती है | पौधों पर Super​(Chlorphyriphos 10% GR)  का छिड़काव कर इस रोग से बचा जा सकता है |

अकोला रोग

अकोला में ऊपर की पत्ती हल्की पीली, सफेद होने लगती है। कुछ दिनों बाद लाल, भूरी होकर नष्ट हो जाती है। इससे गन्ने बढ़वार रुक जाती है। साथ ही प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बंद होने से गन्ना सूखने लगता है।

पोक्का बोइंग रोग

पोक्का बोइंग रोग से गन्ने की बढ़वार रुक गई है। गन्ने के अंगोला के ऊपर की पत्ती हल्की पीली सफेद होने लगी है। फसल को नष्ट होता देख किसान चिंतित है। किसानों ने कृषि विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कर किसानों को उसकी रोकथाम के उपाय बताने की गुहार लगाई है।

गन्ने की खेती के लिए कौन सा कीटनाशक का प्रयोग करें ?

किसान भाइयों, अगर आपके फसल में इस तरह का कोई भी रोग लग रहा है तो आपको घबरानें की जरुरत नहीं है।  क्योंकि आपका साथी GEEKEN CHEMICALS आपके साथ है।  अगर आपके फसल में इस तरह के कोई भी रोग लगतें है तो इसके लिए आप GEEKEN CHEMICALS का बना कीटनाशक Keeban Super​(Chlorphyriphos 10% GR) प्रयोग कर सकतें है।  यह आपको बाजार में आसानी से मिल जायेगा। यह सभी तरह से गन्ने की फसल में काम आता है।  क्लोरपाइरीफास 10 % के Nervous system पर कार्य करने के वजह से यह फसलों पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के कीटों को आसानी से नियंत्रक कर सकता है। क्लोरपाइरीफास से चित्तीदार सुंडी, गुलाबी सुंडी, तेला, चुरदा, व जमीन के अन्दर लगने वाले दीमक जैसे कीटो को भी आसानी से नियंत्रण किया जा सकता हैं।

गन्ने के फसल की पैदावार और लाभ (Sugarcane Crop Yield and Benefits)

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गन्ने की फसल को तैयार होने में 10 से 12 महीने का समय लग जाता है | इसके पौधों की कटाई भूमि की सतह के पास से ही करनी होती है | एक एकड़ के खेत से तक़रीबन 300 क्विंटल की पैदावार प्राप्त हो जाती है, तथा अच्छी देख-रेख कर 1000 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है | गन्ने का थोक बाज़ारी भाव 275 रूपए प्रति क्विंटल होता है | किसान भाई इसकी एक बार की फसल से डेढ़ से दो लाख की कमाई कर अच्छा लाभ कमा सकते है |

निष्कर्ष

किसान भाइयों ने यहाँ जाना कि गन्ने की खेती कैसे की जाती है।  इसको कीटों से कैसे बचाएं।  आप यह लेख GEEKEN CHEMICALS की WEBSITE पढ़ रहें है।  GEEKEN CHEMICALS कई वर्षों से किसान के फायदें को देखते हुए कई तरह के कीटनाशक बनाता आ रहा है।   Geeken Chemicals India Limited भारत के किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद कंपनी में से एक है।