सब्जियों की खेती में बैंगन एक महत्वपूर्ण फसल है | इसकी खेती बड़े पैमाने पर देश के लगभग सभी राज्यों में की जाती है | इसकी अच्छी खेती करने के लिए किसानों को मुख्यतः  बीज, मिट्टी का चयन के अलावा कीट तथा रोग से बचाव पर ध्यान देना होता है | बैंगन के पौधों के तने तथा फल में तना छेदक कीट का प्रकोप रहता है | यह कीट के व्यस्क का प्रकोप रोपाई के कुछ सप्ताह उपरांत ही हो जाता है एवं व्यस्क कीट पौधों पर अंडे दे देता है, जिससे बाद में उससे लारवा निकलकर पौधे के तनों को बेधकर नुकसान पहुंचाते है , उसके पश्चात् फलों को बेधकर सड़ा देते जिससे काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है | GEEKEN CHEMICALS INDIA  LIMTED बैंगन  में कीट उसका प्रबंधन तथा रोग और उसका प्रबंधन की जानकारी लेकर आया है |

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बैंगन की फसल में कीटों एवं रोगों द्वारा काफी नुक्सान होता है| बैंगन की फसल में इन कीट एवं रोगों नियंत्रित करने के लिए किसान बहुत ही जहरीले रासायनिक कीटनाशक का सहारा लेते हैं| किसानों द्वारा इन कीटनाशकों का प्रयोग करने से तीव्र विषैलापन पैदा होता है तथा कटाई के बाद बैंगन में इन कीटनाशकों के अवशेष आ जाते हैं| जब इन्हें खाया जाता है, तब कई तरह की सेहत संबंधी बीमारियाँ हो जाती हैं|

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किसानों द्वारा बैंगन के कीटों का गैर रासायनिक तरीके से प्रबंधन करने के लिए वैज्ञानिकों ने कई सफल विकल्प दिए हैं| जिसको जैविक पद्धति कहते है| इस लेख में बैंगन की फसल में जैविक कीट एवं रोग नियंत्रण कैसे करें की विस्तृत जानकारी का उल्लेख है |

प्रमुख कीट

1. टहनी व फल छिद्रक

किसानों के लिए बैंगन की फसल में टहनी और फल छिद्रक की समस्या काफी भारी समस्या है| इसे नियंत्रित करने के लिए किसान रासायनिक कीटनाशकों का सहारा लेते हैं परंतु कई बार कीटों को नियंत्रण करना बहुत मुश्किल हो जाता है| इसका कारण यह है, कि कीट फल या टहनी के अंदर होते है और कीटनाशक सीधे कीट तक नहीं पहुँच पाता| इसका उग्र प्रकोप होने पर यह बैंगन की फसल को कई बार पूरी तरह से बर्बाद कर देता है| आप इसके लिए Yodha Super का प्रयोग कर सकते है।

2. पत्ते खाने वाले झींगुर

पीले रंग के कीट और शिशु लगातार बैंगन की फसल में पत्तों तथा पौधे के कोमल भागों को खाते हैं और भारी संख्या में पैदा होने पर काफी गंभीर हानि पहुंचाते हैं| जिसके परिणामस्वरूप पत्ते पूरी तरह से कंकाल में बदल जाते हैं तथा केवल शिराओं का जाल ही दिखता है| आप इसके लिए Yodha Super का प्रयोग कर सकते है।

3. लीफ हापर

नवजात तथा व्यस्क दोनों ही बैंगन की फसल में पत्तों की नीचली सतह से रस चूस लेते हैं| संक्रमित पत्ता किनारों सहित ऊपर की और मुड जाता है, पीला पड़ जाता है और जले जैसे धब्बे दिखने लग जाते हैं| इससे रोग भी संचारित होते है, जैसे माइकोप्लास्मा रोग और मोजेक जैसे वायरस रोग इस प्रकोप की वजह से फलों की हालत बहुत बुरी तरह से प्रभावित होती है| इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।

4. लीफ रोलर

केटरपिलर बैंगन की फसल में पत्तों को मोड़ देते हैं तथा उनके अंदर ही रहते हुए क्लोरोफिल को खाकर जिंदा रहते हैं| मुड़े हुए पत्ते मुरझा जाते है व सुख जाते हैं| इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।

5. लाल घुन मकड़ी

घुन बैंगन की फसल का कीट है, कम आपेक्षित नमी में इनकी संख्या बहुत बढ़ जाती है| पत्तों के नीचे के भागों में सफेद रेशमी जालों से ढकी इनकी कालोनियां होती है| जिनमे यह घुन विभिन्न चरणों में पाए जाते हैं| शिशु व व्यस्क कोशिकाओं से रस चूसते हैं, जिससे पत्तों पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं| प्रभावित पत्ते बहुत ही विचित्र हो जाते है तथा भूरे रंग में बदल कर झड़ जाते हैं| इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।

6. सफेद कीट

सफेद खटमल नवजात तथा व्यस्क पत्तों, कोमल टहनियों और फलों से रस चूस लेते हैं| पत्तों में वायरस जैसे ही मुड़ने के विशेष लक्षण दिखते हैं| इन खटमलों द्वारा छिपाई गयी मधुरस की बूंदों पर काली मैली भारी फफूंद लग जाती है| यदि खिले हुए फूलों पर हमला होता है, तो फलों के संग्रह पर प्रभाव पड़ता है| जब फल प्रभावित होते हैं, तब वे पूरी तरह से कीटों से ढक जाते हैं| इस प्रभाव की वजह से या तो फल टूट कर गिर जाता है या सूखी व मुरझाई स्थिति में टहनी से लटका रहता है| इसके लिए आप Sansui (Diafenthiuron 50% WP) का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।

प्रमुख रोग

1. पानी से तर हो जाना

यह रोग पौधों को नर्सरी में बहुत गंभीर क्षति पहुंचाता है| मिट्टी की उच्च नमी तथा मध्य तापमान के साथ, विशेषकर वर्षा ऋतु, इस रोग को बढ़ावा देती है| यह दो प्रकार से होता है, उद्भव से पहले तथा उद्भव के बाद| इसके लिए आप Ribban Plus (Captan 50% WP)  का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।

2. फोमोप्सिस हानि

यह एक गंभीर रोग है, जो पत्तों तथा फलों को प्रभावित करता है| कार्यमंदन के लक्षणों के कारण कवक नर्सरी में ही अंकुरों को प्रभावित कर देती है| अंकुरों का संक्रमण, कार्यमंदन के लक्षणों का कारण बनता है| जब पत्ते प्रभावित होते है, तब छोटे गोल धब्बे पड़ जाते है, जो अनियमित काले किनारों के साथ साथ धुमैले से भूरे रंग में बदल जाते है| डंठल तथा तने पर भी घावों का विकास हो सकता है, जिसके कारण पौधे के प्रभावित भागों को हानि पहुँचती है| प्रभावित पौधों पर लक्षण पल भर में आ जाते हैं, जैसे धंसे निष्क्रिय व धुंधले चिन्ह जो बाद में विलय होकर गले हुए क्षेत्र बनाते हैं| कई संक्रमित फलों का गुद्दा सड़ जाता है|

3. लीफ स्पॉट

बिगड़े हुए हरे रंग के घाव, कोणीय से अनियमित आकार, बाद में धूमैला-भूरा हो जाना, इस रोग के विशिष्ट चिन्ह है| कई संक्रमित पत्ते अपरिपक्व स्थिति में ही गिर जाते हैं, परिणामस्वरूप बैंगन की फसल में फलों की उपज कम हो जाती है|

4. पत्तों के अल्टरनारिया धब्बे

इस रोग के कारण गाढे छल्लों के साथ पत्तों पर विशेष धब्बे पड़ जाते हैं| ये धब्बे अधिकतर अनियमित होते हैं तथा संगठित होकर पत्ते की धर का काफी बड़ा भाग ढक देते हैं, गंभीर रूप से प्रभावित पत्ते गिर जाते हैं| प्रभावित फलों पर ये लक्षण बड़े गहरे छिपे धब्बों के रूप में होते हैं| संक्रमित फल पीले पड़ जाते हैं तथा पकने से पहले ही टूट के गिर जाते हैं|

5. फल सडन 

बैंगन की फसल में अत्याधिक नमी के कारण इस रोग का विकास होता है| पहले फल के ऊपर एक छोटा पानी से भरा जख्म एक लक्षण के रूप में उभरता है, जो बाद में काफी बड़ा हो जाता है| संक्रमित फलों का छिलका भूरे रंग में बदल जाता है तथा सफेद रुई जैसी उपज का विकास हो जाता है| इसके लिए आप Ribban Plus (Captan 50% WP)  का प्रयोग कर सकते है।  जो काफी फायदेमंद है।