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कपास की खेती किसानो के लिए फायदे की खेती के रूप में जानी जाती है। इसकी पैदावार नगद फसल के रूप में होती है। इसके फसल को बेचकर किसान अच्छी कमाई कर लेता है। जिससे उसकी आर्थिक स्थित में सुधार आता है।  भारत के कुछ राज्यों में ही इसकी पैदावार अधिक है। आपको बाजार में अलग – लग तरह के कपास के बीज मिल जायेंगे।

आप यह लेख Geeken chemicals india limted के द्वारा पर पढ़ रहें है।  Geeken chemicals लगातार कई वर्षों से किसान हीत को ध्यान में रखकर काम कर रहा है। किसानों की पैदावार कैसे बढ़ें, कीड़े – मकोड़े से फसल को कैसे बचाया जाए , फसल में लगने वाले रोगों को कैसे खतम किया जाये हम लगातार इसके लिए अलग – अलग तरह का कैमिकल बनाते आरहें है साथ ही भारत के किसान हम पर भरोसा भी जता रहें है।

कपास जो हमारे यहाँ की नगदी फसल है।  इसे हम सफ़ेद सोना भी कहतें है।  भारत में कपास सबसे महत्वपूर्ण फसल में से एक है।  भारत में कपास की खेती सदियों से चली आ रही है, जिसका उल्लेख  ऋग्वेद में भी मिलता है जो ये दर्शाता है की भारतीयों का कपास से वस्त्र बनाने का ज्ञान प्राचीन काल से ही रहा है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है जिसमें पहले नंबर पर चीन आता है। कपास में एक तरह का फल होता है जो बाल्स  कहलाते है, ये चिकने और हरे पीले रंग के होते हैं, फल के अन्दर बीज और कपास की रेशा होती है। भारत में कपास की खेती सबसे अधिक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में होती है। आज हम जानेंगे की कपास की खेती कैसे करें और इसको रोगों से बचानें के उपाय क्या है।

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Contents

उपयुक्त जलवायु

किसान भाइयों अगर आप कपास की खेती कर रहें है तो है तो इसके लिए आपके पास आदर्श जलवायु की जरूरत पड़ती है। बताया जाता है कि कपास की फसल उगने के लिए कम से कम 16 डिग्री सेंटीग्रेट और अंकुरण के लिए 32 डिग्री तापमान होना जरुरी है। फसल को बढ़नें के लिए कम से कम 21 से 27 डिग्री का तापमान होना जरुरी है।  फसल लगते समय इसका तापमान 20 से 30 डिग्री के करीब रहना चाहिए साथ ही रातें भी ठंडी रहनी चाहिए।  वहीँ अगर वर्ष की बात किया जाये तो , 50 सेंटीमीटर के करीब वर्षा भी होना जरुरी होता है।

उपयुक्त भूमि

कपास की खेती के लिए अच्छे से जल निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में वर्षा कम होती है, वहां इसकी खेती अधिक जल-धारण क्षमता वाली मटियार भूमि में की जाती है| जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हों वहां बलुई एवं बलुई दोमट मिटटी में इसकी खेती की जा सकती है| यह हल्की अम्लीय एवं क्षारीय भूमि में उगाई जा सकती है| इसके लिए उपयुक्त पी एच मान 5.5 से 6.0 है| हालाँकि इसकी खेती 8.5 पी एच मान तक वाली भूमि में भी की जा सकती है|

कपास में लगनें वाले रोग 

जड़ गलन रोग 

जड़ गलन रोग कपास की फसल में लगने वाले कुछ घातक रोगों में से एक है। इस रोग के कारण 5 से 17 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो जाते हैं। इस रोग का प्रकोप कपास की खेती किए जाने वाले लगभग सभी क्षेत्रों में होता है। अगर आप भी कपास की खेती कर रहे हैं तो फसल को इस रोग से बचाने के लिए इस रोग के कारण, लक्षण एवं बचाव के तरीके जानना आवश्यक है। आइए कपास की फसल में जड़ गलन रोग पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

जड़ गलन रोग का कारण 

जब भी एक किसान किसी भी फसल को उत्पादित करता है तो उसके दिमाक में बस एक बात चलती है की हमारी फसल अच्छी हो।  उसके लिए वह भरपूर मेंहनत भी करता है।  अगर हम इस रोग की बात करें तो यह राइजोक्टोनिया बटाटीकोला काम की फफूदी के कारण होता है। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि खेतों में ज्यादा जल जमाव हो गया है जिसकी वजह से भी यह समस्या आती है।

जड़ गलन रोग के लक्षण

किसान भाइयों अक्सर आप अपने कपास की फसल में लगने वाले जड़ गलन रोग से परेशान रहते है।  कुछ समय तक तो इसके लक्षण दिखाई नहीं पड़ते जिसके बाद पौधे की जेड सडनें लगती है। इस तरह के रोग से प्रभावित होकर कपास की छाल फटनें लगती है।  इनकी जड़ें अंदर से भूरे व काले रंग की हो जाती है।  अगर इस तरह के रोग का लक्षण दिखाई पड़ें तो आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा हुवा कीटनाशक Zyngo (Hexaconazole 5% SC) का प्रयोग कर सकते है। यह फसल के लिए बहुत ही फायदेमंद है।

विगलन या उकठा रोग 

यह रोग आमतौर पर पहली सिचाई के बाद पौधों की 35 से 45 दिनों के समयकाल के अंदर  दिखना शूरू हो जाता है। विगलन रोग खेत में गोलाकार पेच गोले में दिखाई देतें है । प्रभावित पौधे अचानक मुरझा कर धीरे-धीरे सूख जाते है। ऐसे पौधे हाथ से खींचने पर आसानी से उखड़ जाते है। विगलन रोग के कारण रोगी पौधों की जड़ें अंदर से भूरी व काली हो जाती है । रोगी पौधों को चीर कर देखने पर उतक काले दिखाइ देते है। पौधों की पत्तियां मुरझाकर नीचे गीर जाती हैं। हवा और जमीन में ज्यादा नमी व गरमी होने के कारण एवं सिचाई से सही नमी का वातावरण मिलनें पर यह रोग बढता है।

नुकसान

कपास के बीज उगने से पहले ही सङ जाते है। अगर उग भी  जाते है तो जमीन के बाहर निकलने के बाद छोटी अवस्था में ही मर जाते है जिससे खेत में पौधों की संख्या घट जाती है व कपास के उत्पादन में कमी आ जाती है। GEEKEN CHEMICALS इस तरह के रोगों को खत्म करने के लिए लेकर आया है Ribban (Captan 70% + Hexaconazole 5% WP) , जिसके प्रयोग मात्र से इसमें लगे हुए रोग आसानी से खत्म हो जायँगे।

 जीवाणु अंगमारी झुलसा या कोणीय धब्बा रोग

कपास में मुख्य रूप से जीवाणु अंगमारी झुलसा, आल्टरनेरिया झुलसा तथा मायरोथिसियम पत्ती धब्बा रोग लगते है जिनमें जीवाणु अंगमारी झुलसा उत्तर भारत की मुख्य बीमारी है। यह पौधों के सभी हिस्सों में लग सकता है। इस रोग को कई नामों से जाना जाता है। यह रोग बीज एंव मृदा जनित जेन्थोमोनास एक्जेनोपोडिस पैथोवार मालवेसियरम नामक जीवाणु से पैदा होता है। इसके लक्षण शुरू – शुरू में पत्तियों में दिखाई पड़ते है। इसके जीवाणु बीज के द्वारा पौधे के पत्तों में पहुँच जातें है।  पत्ते पर यह गोले रंग के धब्बे के आकार के होते है।  कुछ दिन बाद यह भूरे या फिर काले रंग के हो जाते है।  इसके साथ ही इसके पत्ते सिकुड़नें लगते है।  अगर इस तरह के रोग का लक्षण दिखाई पड़ें तो आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा हुवा कीटनाशक Vidhata (Validamycin 3% L) का प्रयोग कर सकते है।

रोग और कीटाणु से बचाव 

किसान भाइयों अगर आपके कपास की फसल में रोग या कीड़े – मकोड़े लग गए है तो इसके लिए घबरानें की जरुरत नहीं है।  क्योंकि Geeken chemicals आपके साथ है। आप इसके निवारण के लिए Geeken chemicals का बना प्रोडेक्ट Vidhata, zyngo,riban, bonanza प्रयोग कर सकतें है।  भारत के किसान लगातार इसपर भरोसा करतें है।  यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम कीटनाशक है, जिसका प्रयोग विभिन्न फसलों में प्रभावी कीटनाशी के रूप में किया जाता है। हम किसान की फसल को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाते है।

अगर भारत की बात किया जाये तो सबसे ज्यादा कपास का उत्पादन गुजरात में होता है। क्योंकि गुजरात में सबसे ज्यादा काली मिटटी पायी जाती है। खास तौर पर दक्षिण के गुजरात में यह मिटटी आसानी से मिल जाती है।

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निष्कर्ष 

आपने यहाँ जाना कपास की खेती कैसे करें। हमें आशा है कि किसान भाइयों को आज का यह ब्लॉग पसंद आया होगा।  आप हमारे इस ब्लॉग को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर भी कर सकते है। जिससे यह जानकारी और भी किसानों तक पहुँच सकें। इसके साथ आप GEEKEN CHEMICALS INDIA LIMTED के कीटनाशक या फिर खरपतवार नाशक से किसी भी तरह की जानकारी चाहिए तो आप हमें कॉल (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।  आप हमारी वेबसाइट  (https://geekenchemicals.com/) पर जाकर भी अपने फसल से जुडी जानकारी प्राप्त कर सकते है।