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किसान भाइयों अगर आप अपने खेती से जुड़ा कुछ नया उत्पादन करना चाहते है तो, इसके लिए काली हल्दी की खेती मुनाफे का सौदा हो सकता है। आज हम आपको इस ब्लॉग में काली हल्दी की खेती कैसे करें इसके बारें में बतानें जा रहें है। अगर आप भी कुछ यूनिक खेती करना चाहते है तो आज का यह ब्लॉग आपके लिए काफी कामगार साबित हो सकता है। देश में युवा पीढ़ी खेती की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रही है। ऐसे में खेती करके अच्छी आमदनी इकठ्ठा की जा सकती है। आज की यह खेती आपके किस्मत का दरवाजा खोल सकती है। हल्दी में दोस्तों बहुत सारे औषधि के गुण पाए जाते है जिसकी माँग हमेशा रहती है। काली हल्दी खानें से लोगों का मोटापा भी कम होता है। इसलिए अगर आपका फैट ज्यादा है और आप परेशान है तो काली हल्दी का प्रयोग करके आप इसे खत्म कर सकते है। तो चलिए दोस्तों आज के इस ब्लॉग के माध्यम से जानते है की काली हल्दी की खेती कैसे की जाती है।

दोस्तों आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है। GEEKEN CHEMICALS भारत में सबसे अच्छे तरीके का कीटनाशक प्रदान करता है। आप हमारे ब्लॉग के माध्यम से अपने फसल में लगने वाले कीटों और खरपतवार को आसानी से खत्म करने की जानकारी प्राप्त कर सकते है। अगर आप GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक को खरीदना चाहते है तो हमें कॉल (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।

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Contents

आखिर क्या है काली हल्दी के फायदें

किसान भाइयों काली हल्दी का प्रयोग दवा के रूप में ज्यादा होता है। आज के समय में कुछ कंपनियां काली हल्दी का प्रयोग कॉस्टमेटिक सामान बनाने के लिए भी करती है। वहीँ डॉ निमोनिया, खांसी, बुखार, अस्थमा में भी काली हल्दी के प्रयोग की सलाह देते है। अगर आप इसका लेप नियमित रूप से लगाते है तो आपको कभी भी माइग्रेन की समस्या नहीं होगी। अगर महिलाएं दूध के साथ इस हल्दी का लेप लगाती है तो उनके चेहरे पर निखार आता है।

जानिए कैसे करें काली हल्दी की खेती

काली हल्दी की खेती को हम जून के महीने में कर सकते है। इसकी खेती करने के लिए किसान भाइयों को सबसे पहले अपने खेत को जोत लेना चाहिए। किसान भाइयों को यह हमेशा ध्यान देना होगा की मिट्टी भुरभुरी होने पर ही हल्दी की खेती करें। अच्छी पैदावार के लिए किसान खेत में गोबर का प्रयोग भी कर सकते है। हल्दी की सबसे खास बात यह है की इसकी खेती छायादार जगह पर भी की जाती है। इसके अलावा काली हल्दी को ज्यादा पानी की भी जरूरत नहीं पड़ती। अगर इसकी खेती करते समय इसमें रोग या कीट दिखाई पड़े तो आप Best Agrochemical Company in India जीकेन केमिकल्स द्वारा बनाये जानें वाला कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है।

जानिए कैसे जलवायु की होती है जरुरत

दोस्तों किसी भी फसल की खेती के लिए जलवायु के बारें में जानना बहुत जरुरी है। क्योंकि अगर सही जलवायु के हिसाब से आप खेती नहीं करेंगे तो पौधे में कई तरह के रोग और कीट लगने का डर बना रहता है। जिससे पैदावार भी काफी प्रभावित होती है। अगर हम काली हल्दी की बात करें तो इसके लिए तापमान 15 से 40 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए। कृषि एक्सपर्ट की मानें तो काली हल्दी की खेती के लिए उष्ण जलवायु की जरूरत पड़ती है। इसके पौधे पाले को आराम से झेल सकते है। इसके अलावा विपरीत मौसम में भी पौधे अनुकूल प्रभाव बनाए रखते है।

काली हल्दी के कंद की पहचान

किसान भाइयों काली हल्दी की खेती करने से पहले इसके कंद को पहचानना बहुत जरुरी है। दोस्तों काली हल्दी के कंद राईज़ोम बेलनाकार कालिमायुक्त होते है। जब यह सुख जाता है तो ठोस क्रिस्टल में बदल जाता है। इसके पौधे तना रहित होते है , जिनकी उचाई 30 से 60 सेंटीमीटर होता है। पत्तियां चौड़ी भालाकार और पत्तीयाँ के बीच में एक लम्बी लाइन के जैसे बना होता है। किसान भाइयों इसके पौधे पर बनने वाले फूल का रंग गुलाबी होता है।

काली हल्दी की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव

दोस्तों काली हल्दी की खेती के लिए सबसे अच्छी बलुई, दोमट, मटियार, मध्यम पानी पकड़ने वाली जमीन मानी जाती है। कभी भी काली हल्दी की खेती चिकनी काली मिट्टी में नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसे मिट्टी में कंद का विकास सही से नहीं हो पाता है। मिट्टी का चुनाव करते समय यह ध्यान रखें की खेत में पानी न लगने पाए। अगर हम काली हल्दी की खेती के लिए भूमि के पीएच मान की बात करें तो 5 से 7 के बीच होना चाहिए।

कैसा होना चाहिए काली हल्दी के लिए खेत

इसके लिए दोस्तों पहले अच्छे से खेती की गहरी जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद हम खेत को कुछ दिन तक धुप में ऐसे ही छोड़ देते है। आप चाहें तो खेत में गोबर का खाद भी डाल सकते है। खाद मिटटी में अच्छी तरह से मिल जाये इसके लिए आपको दो से तीन बार जुताई करनी चाहिए। जुताई करने के बाद आप खेत को अच्छी तरह से भरकर पलेवा कर सकते है। पलेवा करने के बाद आपको देखना है की खेत की मिट्टी सूख गयी है या नहीं जब भी मिट्टी सूख जाये आप एक बार फिर से खेत की जुताई कर सकते है। मिटटी अगर पूरी तरह से टूटी नहीं है तो इसके लिए रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरी कर सकते है। जिससे खेत पूरी तरह से समतल हो जाए।

कब की जाती है काली हल्दी की खेती

किसान भाइयों काली हल्दी की खेती जून – जुलाई महीने में की जाती है। अगर सिचाई की अच्छी व्यवस्था है तो आप इसे मई में भी लगा सकते है। लेकिन इसको लगाने से पहले जानकारी रखना जरुरी है , जिससे अच्छी तरह से इसकी खेती की जा सकें। किसान भाई निरंतर GEEKEN CHEMICALS की इस वेबसाइट पर आकर भी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

काली हल्दी की रोपाई

किसान भाइयों काली हल्दी की रोपाई कतारों में करनी चाहिए। यह हमेशा ध्यान रहें कि प्रत्येक कतार के बीच 2 फीट की दूरी होना जरुरी है। अगर हम कंदो की बात करें तो इसके लिए 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी होना चाहिए। इसकी रोपाई को किसान भाई 7 सेंटीमीटर की गहराई में कर सकते है। अगर पौधे के रूप में इसकी रोपाई कर रहें है तो मेड़ बनाकर करें। मेड़ की चौड़ाई आधा फिट रखना जरुरी है।

कैसे तैयार की जाती है काली हल्दी का पौधा

काली हल्दी की रोपाई को पौध तैयार करके किया जाता है। इसके पौध को तैयार करने के लिए किसान रोपाई ट्रे या पॉलीथिन में मिट्टी भरकर आसानी से कर सकते है। कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक इसके कंदो को रोपाई करने से पहले बाविस्टिन की उचित मात्रा से उपचारित कर लेना चाहिए। इसके कंद रोपाई के दो महीने के बाद खेत में लगानें के लिए तैयार हो जाते है। पौधे की रोपाई किसान भाइयों को बरसात के मौसम में करना चाहिए।

कब करना चाहिए काली हल्दी के पौधे की सिचाई

काली हल्दी की खेती करने वाले किसानों की मानें तो इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके लिए नमी वाली जगह सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके कंद और पौधों को रोपाई के तुरंत बाद सिचाई कर देना चाहिए। अगर मौसम गर्म है तो आप इसकी सिचाई 10 से 12 दिन के बाद कर सकते है। वहीँ अगर ठण्ड का मौसम है तो इसकी सिचाई 15 से 20 दिन के बाद कर सकते है।

काली हल्दी के पौधे में खरपतवार नियंत्रण

किसान भाइयों आप इसके खरपतवार को निराई – गुड़ाई करके नियंत्रित कर सकते है। हमें पौधे के रोपाई करने के बाद निराई – गुड़ाई कर देना चाहिए। अप्प पहली बार निराई गुड़ाई 20 से 30 दिन के बाद कर सकते है। इसके पौधे के अगल – बगल खरपतवार ज्यादा दिखाई पड़ते है ऐसे में आप 3 गुड़ाई कर सकते है। किसान भाइयो यह ध्यान रखें की 50 दिन के बाद इसकी गुड़ाई नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा अगर खरपतवार खत्म नहीं हो रहें है तो आप अपने नजदीकी बाजार में जाकर Top Agricultural Chemical Companies in India जीकेन केमिकल्स के द्वारा निर्मित खरपतवारनाशी का प्रयोग कर सकते है। जिसे सरकार के द्वारा भी सबसे अच्छे कैमिकल का ख़िताब प्राप्त हो चूका है।

काली हल्दी के पौधे की खुदाई और पैदावार

इसके पौधे कम से कम 3 – 4 महीने के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते है। इसकी खुदाई ज्यादातर हिस्सों में किसान जनवरी से मार्च के बीच में करते है। इसकी पैदावार भी काफी अच्छी होती है। आज के समय में काली हल्दी की मांग बाजारों में दिन – प्रतिदिन बढ़ती जा रही है इसलिए आप इसकी खेती करके अच्छा पैसा कमा सकते है। सरकार भी लगातार इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है , आप सरकार के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के लाभ उठाकर खेती को और आसान , सुगम बना सकते है।

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निष्कर्ष

दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हमनें जाना की कैसे की जाती है काली हल्दी की खेती। आशा है कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। आप हमारे इस ब्लॉग को पूरा पढ़ें और अपने दोस्तों , रिश्तेदारों में जरूर शेयर करें जिससे और भी लोग अपने खेती के प्रति जागरूक हो सकें। अगर आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें कैमिकल को खरीदना चाहते है तो हमें कॉल (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।