किसान आज के समय में सब्जियों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते है।  सब्जियां बहुत ही कम समय में तैयार हो जाती है ऐसे में  इसकी खेती करने से किसान भाइयों को काफी मुनाफा होता है। किसान अगर सही समय पर सही सब्जी का चुनाव करके खेती करें तो ज्यादा पैदावार और लाभ प्राप्त की जा सकती है। ऐसे में जनवरी का महीना सब्जियों की बुवाई के लिए काफी अच्छा और फायदेमंद माना जाता है।  किसान अगर इस महीने में ककोडा की खेती करते है तो काफी फायदा हो सकता है।  ककोड़ा भले ही जंगली सब्जी है लेकिन इसकी खेती करने से किसान भाइयों को काफी अच्छा लाभ मिल सकता है। बाजार में भी ककोड़ा की कीमत काफी ज्यादा है , इसे देखते हुए आज के किसान भाइयों को ककोडा की खेती जरूर करनी चाहिए।  आइये आज के इस ब्लॉग में हम जानते है कि ककोडा की खेती कैसे करनी चाहिए साथ ही इसकी खेती करते समय हमें कौन – कौन सी बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए।  चलिए दोस्तों शुरू करते है आज का ब्लॉग अगर अच्छा लगे तो इसे शेयर जरूर करिएगा। 

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भारत में ककोडा की खेती

आज के समय में काकोडा की खेती काफी फायदेमंद खेती मानी जाती है।  भारत में भी किसान लगातार इसकी खेती के लिए आगे बढ़ रहे है।  बाजार में ककोडा की मांग हमेशा रहती है जिसकी वजह से इसे मुनाफ़े वाली खेती मानी जाती है।  भारत के किसान जनवरी के महीने में ककोडा की खेती करते है। ककोडा को हम जंगली सब्जी के नाम से जानी जाती है।  सबसे ज्यादा खास बात यह है कि इसकी खेती एक बार करने पर 8 से 10 तक लाभ मिल सकता है। 

 किसान भाइयों ककोडा की खेती कद्दू वाली फसल के रूप में किया जाता है।  ककोडा को भारत में कई तरह के नामों से जाना जाता है इसे कुछ जगह पर  कर्कोटकी, काकोरा, कंटोला, वन करेला, खेखसा, खेसका, अगाकारा, स्पाइन गार्ड, मोमोर्डिका डायोइका आदि तरह के नामों से पुकारा जाता है। इसका फल करेले की तरह ही होता है , जिसके फल पर छोटे – छोटे रेशे होते है।  राजस्थान में इसकी खेती प्रमुखता से की जाती है।  गांव के लोग ककोड़ा से साग को बनाते है और बड़े ही चाव से खाते है।  इसके साग को खाने से बहुत तरह की स्वादिष्ट चीजें प्राप्त होती है।  

साल में दो बार कर सकते हैं ककोड़ा की खेती

ककोड़ा की खेती बारिश के मौसम में की जाती है।  कुछ जगह पर ककोड़ा स्वतः ही उग जाता है।  ऐसे में इसकी खेती करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते है।  भारत के कुछ हिस्सों में इसकी खेती गर्मी के मौसम में भी की जाती है। इस सब्जी की खास बात यह है कि एक बार इसकी खेती करने पर कई सालों तक पैदावार प्राप्त किया जा सकता है। कई बार तो इसके बीज अपने आप उग आते है , इसे बार – बार बोन की जरूरत भी नहीं पड़ती है। गांव में ज्यादातर इसके बीज बरसात के मौसम में उगते है। 

ककोड़ा की खेती के लिए कहां से मिलेगा बीज

किसान भाइयों बरसात के मौसम में अक्सर इसके बीज दिखने लगते है।  ज्यादातर इसके बीज मेड़ पर या फिर खेत के किसी कोने में दिखाई पड़ते है।  इसी कारण हमें इसके बीज को खरीदने के लिए भी कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।  जैसे ही इसका सीजन खत्म होता है ककोड़े के बीज अपने आप गिरने लगते है।  जंगल में मिलने की वजह से इसे जंगली फल भी कहा जाता है।

कंकोड़ा की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु

इसकी खेती के लिए मिट्टी का चुनाव सही तरीके से करना चाहिए।  इसकी खेती ज्यादातर  कार्बनिक पदार्थों और जीवांश से भरपूर दोमट मिट्टी में की जाती है।  ककोड़ा की खेती के लिए मिट्टी का पी एच मान 5.5 से 7 के बीच होना जरुरी है।  यह गर्म और नमी वाले क्षेत्रों में जल्दी उगते है। ककोड़े की खेती के लिए मिट्टी तापमान 25 से 40 डिग्री के करीब होना चाहिए।  पहाड़ी क्षेत्रों में ककोड़े को जुलाई – अगस्त के मौसम में उगाते है।  जबकि मैदानी क्षेत्रों में इसकी खेती जनवरी – फरवरी के महीने में की जाती है। 

कंकोड़ा की तुड़ाई

इसके पौधे को अंकुरित होने के लिए लगभग एक महीने तक का समय लगता है।  जब भी ककोड़ा का पौधा बढ़ता है तो इसकी कलियाँ फूटने लगती है ऐसे में इसको तोड़ लेना चाहिए।  किसान इसके फल की तुड़ाई 3 -4 बार आराम से कर सकते है।  इसके बाद इसको अच्छे से पैक करके बाजार में बेचने के लिए भेज देना चाहिए।

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निष्कर्ष :-

आज के इस ब्लॉग में हमने जाना की कंकोड़ा की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु कौन सी है।  किसान भाइयों आज के समय में बाजार में भी इसकी मांग काफी ज्यादा है।  अगर आप अपने फसल का बेहतर तरीके से उत्पादन करना चाहते है तो GEEKEN CHEMICALS के प्रोडक्ट का प्रयोग कर सकते है। GEEKEN CHEMICALS के प्रोडक्ट को 10 लाख से भी ज्यादा किसान प्रयोग कर रहे है।  अगर आप GEEKEN CHEMICALS के प्रोडक्ट को खरीदना चाहते है तो कॉल (+91 -9999570297) करें।