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देश से भयंकर बीमारी कोरोना का लगभग अंत हो चूका है।  इस बीमारी में हमें आयुर्वेद की औषधियों का सेवन करके स्वास्थ्य में काफी लाभ देखने को मिला। आयुर्वेद की पद्धति विश्व में सबसे पुरानी है, जिसका उपयोग हम पिछले कई सालों से करते आरहें है।

कोरोना के समय में देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी औषधीय पौधों की मांग में काफी तेजी देखी गयी है। वहीँ इसकी खेती करने वाले किसानों में काफी लाभ भी कमाया है।  कई ऐसी कंपनियां भी है जो आयुर्वेद को बढ़ावा दे रहें है , इसलिए इसकी मांग भी हमेशा बनी रहती है।  आज हम आपको महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की जानकारी प्रदान करने जा रहें है,

जिससे किसान भाई अपने क्षेत्र की जलवायु, मौसम और भूमि के आधार इसकी खेती आसानी से कर सकते है।  केंद्र सरकार भी इसकी खेती करने वालों को अनुदान भी प्रदान कर रही है।  आज के किसान अगर आयुर्वेद की औषधियों पौधों की खेती करते है तो उन्हें इससे अच्छा मुनाफा कमानें को मिल सकता है।

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के द्वारा पढ़ रहें है।  हम आप तक कृषि से जुडी हर छोटी बड़ी जानकारी को आसानी से उपलब्ध करवाते है।  आप अपने फसलों में लगने वाले कीड़ों और खरपतवार को खत्म करने के लिए GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनाये हुए प्रोडक्ट भी आसानी से प्रयोग कर सकते है।

हमारे प्रोडक्ट को खरीदने के लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीका प्रयोग कर सकते है।  हम भारत के किसानों के बेहतर फसल सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा कीटनाशक प्रदान करते है। भारत के किसान लगातार कई वर्षों से हमारे ऊपर अपना भरोसा भी जता रहें है।

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Contents

एलोवेरा की खेती (Aloe Vera Cultivation)

कोरोना काल के बाद लोग अपनी  इम्युनिटी बढ़ाने के लिए तरह – तरह के नुस्खे अपना रहें है। जिसके बाद से ही देश दुनिया में आयुर्वेदिक और इम्युनिटी बढ़ाने चीजों की डिमांड बढ़ गयी है। उन्हीं प्रोडक्ट में एलोवेरा भी शामिल है।

एलोवेरा की अगर हम बात करें तो यह कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और आयुर्वेदिक दवा दोनों जगह इसका प्रयोग किया जाता है।  यही वजह है की एलोवेरा की मांग बाजारों में हमेशा रहती है और किसान इसकी खेती करके अच्छा पैसा कमा सकते है।

कृषि एक्सपर्ट बताते है कि आप सिर्फ एक बार इसका पौधा लगाकर 5 साल तक मुनाफा कमा सकते है। ज्यादातर एलोवेरा का प्रयोग स्किन से जुडी बीमारी में किया जाता है वहीँ कोरोना के बाद से हैंड सेनीटाइजर में भी इसका खूब प्रयोग देखा गया है।  इसकी खेती के लिए भी किसान भाइयों को ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती है।  आप अगर बिना मेहनत के पैसा कमाना चाहते है तो एलोवेरा सबसे अच्छा विकल्प है।

एलोवेरा की कहती के लिए किसान भाइयों को उष्ण जलवायु की जरूरत पड़ती है।  इसकी कहती किसान शुष्क क्षेत्र में न्यूनतम वर्षा और गर्म आर्द्र क्षेत्र बेहतर तरीके से कर सकते है। धूसर मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

एलोवेरा की खेती ठण्ड में नहीं करनी चाहिए क्योंकि एलोवेरा का पौधा ठण्ड के मौसम में संवेदनशील होता है , इस दौरान किसान भाइयों को इसकी खेती करने से बचना चाहिए। एलोवेरा की खेती के लिए आप दोमट मिट्टी और रेतीली मिट्टी का भी प्रयोग कर सकते है।

इसकी खेती के लिए जुलाई और अगस्त का महीना सबसे अच्छा माना गया है।  इसकी खेती के लिए ज्यादा पानी की भी जरुरत नहीं पड़ती है।  इसलिए इसके पौधे आसानी से उग जाते है।  अगर आप एलोवेरा में लगे हुए रोगों को खत्म करना चाहते है तो INDIAS NO 1 AGROCHEMICALS COMPANY जीकेन कैमिकल के कीटनाशक का प्रयोग कर खत्म कर सकते है।

गिलोय की खेती (giloy cultivation)

गिलोय भी एक तरह का औषधीय पौधा है। जिसके प्रयोग से कई तरह की बीमारी को आसानी से ख़त्म किया जा सकता है।  यह देखने में बिल्कुल पान की तरह होता है।  इसकी लताएं उगती है और वहीं बढ़ती भी है। गिलोय के पत्ते हरे रंग के दिल के आकार के होते है। इसका प्रयोग हम रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ानें के लिए काढ़ा के रूप में करते है।  इसकी खेती किसान किसी भी समय पर आसानी से कर सकते है।

कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक गिलोय की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। अगर आप खेत में गिलोय की खेती कर रहें है तो सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करके खरपतवार को खत्म करना चाहिए लेकिन अगर भी खेत से खरपतवार खत्म नहीं हो रहें है तो आपको GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें खरपतवार नाशी का प्रयोग करना चाहिए।

किसान भाई गिलोय की गांठ सहित तनों की कटिंग को आमतौर पर खेत में लगातें है।  अगर आप इसकी अच्छी पैदावार करना चाहते है तो पौधों को 3 -3 मीटर की दुरी पर लगाना चाहिए।  गिलोय का पौधा जब बड़ा होने लगता है तो उसे सहारे की जरुरत पड़ती है इसके लिए आप लकड़ी की खपच्चियां (डंडे) लगा सकते हैं।  इसके पौधे को ज्यादा पानी की भी जरूरत नहीं पड़ती है। वहीँ इसके पौधे पर किसी भी तरह के कीट का भी प्रकोप नहीं पड़ता है।

अश्वगंधा की खेती

यह एक तरह का झाड़ीदार पौधा होता है।  इसकी जड़ों में से अश्व जैसी गंध आती है, इसलिए इसे अश्वगंधा कहते है।  इसका प्रयोग भी जड़ी – बूटी के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग लोग अक्सर तनाव और चिंता से दूर रहने के लिए करते है।  इसकी जड़ , तना , पत्ती , फल , और बीज का उपयोग भी हम औषधि के रूप में करते है।

किसान भाइयों के लिए इसकी खेती काफी फायदेमंद मानी जाती है।  अगर किसान इसकी खेत करें तो कई गुना कमाई कर सकते है।  अश्वगंधा को हम बलवर्धक, स्फूर्तिदायक, स्मरणशक्ति वर्धक, तनाव रोधी, कैंसररोधी भी मानते है।  यह कम लागत में ज्यादा उत्पाद देने वाली फसलों में से एक है। इसकी फसल पर प्राकृतिक आपदा का खतरा भी बहुत कम होता है।  इसकी खेती के लिए जुलाई से सितम्बर का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।  आज के समय में भारत के किसान लगातार इसकी खेती करके अच्छा मुनाफा कमा रहें है।

इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी और लाल मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।  इसकी खेती के लिए जमीन का पीएच मान 7.5 से 8 के बीच होना चाहिए।  अगर दिए हुए तापमान के अनुसार आप इसकी खेती करते है तो पैदावार काफी अच्छी होती है। ज्यादातर इसकी खेती गर्म प्रदेशों में की जाती है। वहीँ इसके पौधे की बढ़वार के लिए खेत में नमी होना जरुरी है।

इसकी कटाई किसान जनवरी से लेकर मार्च के महीने तक करते है, जिसमें पौधों को जड़ों से अलग कर दिया जाता है।  कटाई के बाद इसकी जड़ों को छोटे – छोटे टुकड़े में करके सूखा देते है, जिसके बाद फल से बीज और सुखी पत्ती को अलग कर बाजार में बेचने के लिए तैयार कर लिया जाता है।

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निष्कर्ष 

आपने यहाँ पर जाना कि कैसे  औषधीय पौधों की खेती कर सकते है और उनके क्या लाभ है।  आशा है कि किसान भाइयों को हमारी यह जानकरी पसंद आयी होगी।  आप हमारे इस ब्लॉग को शेयर करना न भूलें , जिससे और भी लोग अपने खेती के प्रति जागरूक हो सकें।  GEEKEN CHEMICALS के Best Quality Pesticide Products से जुडी किसी भी तरह की अन्य जानकारी के लिए आप हमारे सलाहकार को कॉल (+91-9999570297) भी कर सकते है|