GEEKEN CHEMICALS :- किसान भाइयों आज हम आपको बतानें जा रहें है ताड़ी के बारे में , जिसे खजूर , नारियल और ताड़ तीनों ही पेड़ पर से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इसे हम अंग्रेजी में पाम वाइन भी कहते है। ताड़ी का प्रयोग पेय पदार्थ को बनाने और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। दोस्तों प्राकृतिक औषधीय को बनाने के लिए हम ताड़ी का प्रयोग करते है , इसके अलावा दोस्तों ताड़ी में एल्कोहल की मात्रा भी पायी जाती है। जिसके कारण बहुत से ऐसे लोग है इसे पीना पसंद नहीं करते है ,लेकिन आज के समय में अगर ताड़ी पिया जाएं तो यह बहुत फायदेमंद है।

दोस्तों ताड़ी में पोषक तत्व काफी मात्रा में पाया जाता है। जो हमारे शरीर में बैठे कीटाणु को खत्म करता है और हमारे बीमारी के लक्षण को कम करता है। दोस्तों वैसे तो ताड़ी के बहुत फायदें है , लेकिन इसके कुछ नुकसान भी सामनें आ रहें है ऐसे में अगर आप इसे पिने की सोच रहें है तो आइये इसके बारे में विस्तार से जानतें है। दोस्तों इस ब्लॉग को पूरा पढियेगा और अच्छा लगें तो इसे शेयर भी जरूर करियेगा।

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है। हम आपके लिए कृषि से जुडी जानकारी पहुचानें का काम करते है। किसान भाइयों अगर आप अपने फसल का बेहतर उत्पादन चाहते है तो ब्लॉग को पढ़ते रहें इसके अलावा अगर फसलों में रोग , कीट खरपतवार इत्यादि दिखाई पड़ रहें है तो आप GEEKEN CHEMICALS कके द्वारा बनें कीटनाशक का प्रयोग करें।

Contents

भारत में ताड़ी का पेड़ :-

ताड़ी के पेड़ को किसान भाइयों कहीं – कहीं पर ताड़ का पेड़ भी कहतें है। ताड़ी एक तरह का लम्बा व सीधा पेड़ होता है लेकिन इसके पेड़ में डालियाँ बहुत कम होती है। ताड़ी के पेड़ के तने पर ही पत्तियां निकलती है। यह पेड़ दो प्रकार का होता है एक नर , नारी। किसने भाइयों इसके नर पेड़ में सिर्फ फूल निकलते है और नारी पेड़ में से गोल – गोल फल निकलते है , जिसे उत्तर प्रदेश , बिहार , छत्तीसगढ़ में खाजा के फल के नाम से जानतें है। ताड़ी का फल बहुत ही कठोर होता है , जिसको तोड़नें पर लीची की तरह मीठा गुदा निकलता है।

यह भी पढ़ें :- यहां जानिए पुदीना उगानें का सबसे अच्छा तरीका ?

ताड़ी कैसे बनती है

ताड़ी एक तरह का पेय और द्रव्य पदार्थ होता है ,जो ताड के वृक्ष से निकलनें वाले रस से बनता है। यह रस अप्रैल से जुलाई के महीने में ताड़ के पेड़ पर लगे हुए फल से निकलता है। इसके पेड़ अगर भारत की बात करें तो सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड राज्य के नदी एवं समुद्र की तरफ ज्यादा दिखाई पड़ते है। अगर इसके सेवन की बात किया जाए तो सबसे ज्यादा केरल जैसे राज्यों में किया जाता है। ताड़ी पीने से कई तरह की बीमारी आसानी से खत्म होती है , जो हमारे रक्त के प्रवाह को सही करता है और शरीर के ऊतकों, अंगो और तंत्रिकाओं को विटामिन भी प्रदान करता है। अगर एक उचित मात्रा में ताड़ी का सेवन किया जाए तो इसका कोई नुकसान नहीं है।

ताड़ की खेती के लिए जलवायु

ताड की खेती भारत में प्रमुखता से की जाती है , यह बारहमासी फसलों में से एक है , यह पेड़ हमें सबसे ज्यादा तेल भी प्रदान करता है। यह एक तरह का आर्द्र उष्णकटिबंधीय फसल है , जो सभी भारत में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खेती के लिए तापमान 22 डिग्री सेल्सियस से 24 डिग्री सेल्सियस और 20 डिग्री सेल्सियस से 33 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। किसान भाइयों इसकी खेती के लिए वर्षा पर निर्भर करती है ऐसे में इसकी फसल के लिए 2500 से 4000 मिमी० या 100 से 150 मिमी० वर्षा की जरूरत पड़ती है। इसके अच्छे उत्पादन के लिए हमें तेज धूप की भी जरूरत पड़ती है।

ताड़ की फसल के लिए मिट्टी

ताड़ की खेती हम अलग – अलग प्रकार की मिट्टी में कर सकते है। लेकिन इसकी खेती अच्छी तरह से गहरी सुखी दोमट मिट्टी में करना चाहिए। इसके पेड़ के लिए कम से कम 1 मीटर गहरी मिट्टी की जरूरत पड़ती है। इसकी खेती करते समय किसान भाइयों अत्यधिक खारा, अत्यधिक क्षारीय, तटीय रेतीली और पानी की स्थिर मिट्टी से करने की जरूरत होती है।

ताड़ की खेती के बीज

किसान भाइयों ताड की खेती के लिए हमें बीजों की जरूरत पड़ती है जिसे सबसे पहले 75 दिनों तक प्री-हीटिंग की जाती है। 4 -5 दिन के बाद हम इसे ठंडा होने के लिए रख देते है जिससे 10 -12 दिन के बाद यह अंकुरित होने लगते है। जब भी बीज अंकुरित होने लगें तब बीजों की बुवाई कर देनी चाहिए।

खेत की तैयारी, दूरी एवं रोपाई (Palm tree farming)

ताड़ की खेती के लिए हमें मिट्टी में उपजें खरपतवार को सबसे पहले खत्म कर लेना चाहिए। इसके बाद आप खेत की जुताई करवाकर मिट्टी को भुरभुरा बना सकते है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए आप कार्बनिक पदार्थ का प्रयोग कर सकते है। इसकी रोपाई के लिए जुलाई से दिसंबर का महीना सबसे अच्छा माना जाता है। ताड के पौधे को त्रिकोणीय रोपण विधि के द्वारा 9 मीटर x 9 मीटर x 9 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए। जिससे आपदावर अच्छे से मिल सकें। इसके खरपतवार को खत्म करने के लिए आप Best agrochemical companies in India के द्वारा निर्मित खरपतवार नाशी कैमिकल का प्रयोग कर सकते है।

यह भी पढ़ें :-  भारत के 10 प्रमुख राज्य जहां होती है सबसे ज्यादा खेती

ताड़ की फसल उपज

किसान भाइयों ताड़ के पौधे 3 -5 साल बाद उपज प्रदान करते है। इसके फलों की तुड़ाई एक निश्चित समय पर की जाती है। ताड़ तेल की गुणवत्ता और मात्रा को प्रभावित करता है। ताड़ की तुड़ाई तब की जाती है जब फल इसके पीले और नारंगी रंग के दिखनें लगें और पेड़ से फल अपने आप गिरनें लगें। इसके बाद आप इसे फल को अपनी ऊँगली से दबाकर भी पकनें का अंदाजा लगा सकते है। किसान भाइयों ताड़ की कटाई पूरे साल की जाती है। आज के समय में इसकी माँग भी बहुत है ऐसे में इसकी खेती करके किसान अच्छा पैसा कमा सकते है।

ताड़ी पीने के लाभ

दोस्तों ताड़ी का सेवन आपको काफी फायदा पहुंचा सकता है लेकिन इसका सेवन उचित मात्रा में करना ही सही है। ताड़ी में फाइबर काफी अधिक मात्रा में पाई जाती है। जो किसी भी चीज को खानें के बाद ठीक से पचाता है। यह हमारे स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को मजबूत रखता है। इसके अलावा आप ताड़ी का प्रयोग पेट से जुडी अन्य समस्या के लिए भी कर सकते है।

इसका सेवन शरीर में खून की कमी को भी पूरा करता है क्योंकि खून की कमी हमें आयरन की वजह से होती है। ताड़ी में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस तरह से अगर देखा जाए तो ताड़ी आयरन की कमी को भी आसानी से पूरा कर सकती है। जिससे हम एनीमिया जैसे रोग से बच सकते है।

इसके अलावा किसान भाइयों ताड़ी का प्रयोग आप वजन बढ़ानें के लिए भी कर सकते है। इसमें जो पोषक तत्व पाया जाता है , वह हमारे शरीर के वजन को बढ़ाता है। इसलिए आप दूध और हल्दी के साथ ताड़ी को मिलाकर भी पी सकतें है।

ताड़ी हमारी हड्डियों को भी मजबूती प्रदान करता है। अगर कृषि एक्सपर्ट की मानें तो इसमें खनिज, विटामिन और कैल्शियम के प्रमुख घटक आसानी से उपलब्ध होते है। यह हमारे हड्डियों के विकास को भी तीव्र गति से बढ़ाता है।

ताड़ी पीने के नुकसान

किसान भाइयों अगर आप ताड़ी का सेवन ज्यादा समय तक करते है तो यह आपके लीवर, मस्तिष्क, हृदय, अग्न्याशय तथा शरीर के अन्य अंगो को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।

ताड़ी का ज्यादा सेवन आपके सिरदर्द को भी बढ़ा सकता है।

इसके सेवन से कुछ लोगों को चक्कर आने लगता है।

इसका सेवन अगर पुरुष ज्यादा समय तक करते है तो पुरुषो में इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्या हो सकती है।

कभी भी ताड़ी का सेवन गर्भवती औरतों को नहीं करना चाहिए।

यह भी पढ़ें :- दिसंबर में उगाई जाने वाली सब्जियां , जिसकी खेती करके किसान हो जाएंगे मालामाल

निष्कर्ष :-

किसान भाइयों आज के इस ब्लॉग में हमनें जाना की ताड़ की खेती कैसे की जाती है। आशा है कि किसान भाइयों को हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। आप हमारे इस ब्लॉग को जरूर शेयर करें और अगर आप खेतो से जुडी कोई अन्य जानकारी चाहते है तो हमारे कमेंट बॉक्स में पूंछ सकते है। किसान भाइयों अगर आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें कीटनाशक का प्रयोग करना चाहते है तो अपने नजदीकी दूकान से खरीदकर आसानी से कर सकते है। हमारे कीटनाशक आज के समय में भारत के सभी दुकानों पर उपलब्ध है। जीकेन Top agrochemical companies in India में से एक है। अगर जीकेन से जुड़ी कोई अन्य जानकारी चाहते है तो हमारे नंबर (+91 – 9999570297) पर कॉल करें।