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भारत में खेती प्राचीन काल से ही होता आ रहा है।  भारत की पहचान इसी वजह से विश्व भर में कृषि प्रधान देश के रूप में है।  यहाँ तक की भारत की अर्थव्यवस्था भी कृषि पर ही टिकी हुई है।  भारत में खेती कब से की जाती है इसके बारें में फ़िलहाल सही जानकरी नहीं है।  लेकिन भारत के बहुत से लोगों के लिए कृषि ही जीवनयापन का जरिया है।  आज के इस ब्लॉग में हम भारत में उगाई जानें वाली फसलों पर चर्चा करंगे।  यहाँ पर हम जानेंगे की फसल क्या होती है, भारत में फसलों के प्रकार  और फसल चक्र से जुडी सम्पूर्ण जानकारी।  जिससे हम अपनी खेती को और बेहतरीन बना सकते है।

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है।  हम आप तक खेती से जुडी जानकारी प्रदान करते है।  इसके आलावा भारत में हम बेहतर तरीके के Best Quality Pesticide Manufacturers कीटनाशक भी बनाते है जिसके प्रयोग से किसान अपने फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकते है और फसल में लगने वाले हानिकारक रोग , कीट , कवक , खरपतवार को खत्म कर सकते है।  भारत के कई राज्यों में हमारे स्टोर उपलब्ध है जहां से आप अपने फसल से जुडी जानकारी को आसानी से प्राप्त कर सकते है।

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Contents

फसल किसे कहते है 

दोस्तों हम सभी जानते है कि हमें अगर जीवित रहना है तो जरूरत के हिसाब से भोजन भी करना है।  लेकिन प्राचीनकाल में लोगों के पास जानकारी का आभाव था जिस कारण वह सही तरीके से खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाते थे।  लेकिन अपने जीवन को चलानें के लिए वह भी स्वयं से उगी हुई वनस्पतियों एवं पेड़ – पौधों से भोजन प्राप्त किया करते थे।  जैसे – जैसे जनसँख्या में वृद्धि हुई मानव ने अविष्कार करना शुरू किया।  इन्ही आविष्कारों के बीच मनुष्य ने अपने खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खेती करना प्रारम्भ किया।

लेकिन जैसे – जैसे समय बीतता गया मानव का भी मानसिक विकास हुआ और उनकी जनसंख्या में भी काफी बढोत्तरीय हुई।  जिसकी वजह से मनुष्य की भोजन की भी आवश्यकता बढ़ने लगी।  अपने इन्ही जरूरत को पूरा करने के लिए मानव ने एक निश्चित समय के अनुसार अलग – अलग तरीके का फसल उगाना शुरू किया।  मनुष्य अपने खाने की आवश्यकता के अनुसार जिन पेड़ पौधों का उत्पादन करता है उसे ही हम फसल कहते है।  इसे अगर साधारण भाषा में कहें तो जो भी चीजें हम एक बड़े क्षेत्रफल में पैदा किये जानें वाले पौधे का वह समूह जिससे हम भोजन की पूर्ति के साथ ही आर्थिक अर्जित करते है उसे ही फसल कहते है।

फसलों के प्रकार  

किसान भाइयों , फसलों के मुख्यतः तीन प्रकार होते है।  जिनकी जानकारी निचे दी जा रही है।

खरीफ की फसल  

जून और जुलाई में हम जिसे फसल की खेती करते है उन्हें खरीफ की फसल कहा जाता है।  इसे हम वर्षा ऋतू की फसल भी कह सकते है।  इसके फसल उत्पादन के लिए बुवाई के समय में  हवा में नमी के साथ ही सामान्य तापमान की जरूरत पड़ती है।  जबकि फसल को पकने के लिए तापमान में गर्मीं अर्थात अधिक धूप होना जरुरी है।

खरीफ की फसल में मुख्यतः धान, मक्का, बाजरा, मूंगफली, उड़द, मूंग, मूंगफली, जूट आदि फसल की खेती की जाती है।

रबी की फसल  

रबी की फसल की खेती हम अक्टूबर – नवम्बर महीने में करते है।  इसे हम सर्द में जानें वाली खेती भी कह सकते है।  रबी की फसल को पैदा करने के लिए कम तापमान और कम पानी की जरूरत पड़ती है।  जबकि फसलों को पकने के लिए गर्मी और तेज धुप का होना जरुरी है।  कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक रबी की फसल को अक्टूबर महीने के बाद ही बोया जाता है।

रबी की प्रमुख फसल में मसूर, सरसो, चना, मटर, सरसों, जौ, आलू, तम्‍बाकू, गन्ना, चुकन्दर शामिल है। जिसका अपने – अपने तरीके से खेती की जाती है।

जायद की फसल

कृषि एक्सपर्ट बताते है कि जिन फसल को पकने में कम समय लगता है वह जायद की फसल कहलाती है। अगर सामान्य भाषा में कहें तो खरीफ की फसल और रबी की फसल के बीच में पैदा की जानें फलें फसल को जायद की फसल कह सकते है।  जायद की खेती भारत में मार्च और जून के महीने में की जाती है।

जायद की प्रमुख फसल में ककड़ी, खीरा, तरबूज, तरोई, खरबूजा और टमाटर शामिल है।

क्या होता है फसल चक्र

भारत में फसल का उत्पादन किसान मौसम और जरूरत के हिसाब से करते है।  अगर फसल चक्र की बात करें तो किसी एक तय समय सिमा में अनेक प्रकार के फसलों का उत्पादन ही फसल चक्र कहलाता है।  आपको बता दें कि फसल चक्र को भारत में कई जगह सस्य चक्र, सस्य आवर्तन के नाम से भी जानते है।  दूसरे शब्दों में अगर कहें तो , किसी तय भूमि और तय समय में फसलों को बदल – बदल कर बोना ही फसल चक्र कहलाता है।

क्या है फसल चक्र का महत्त्व  

किसान जब भी एक निश्चित भूमि में एक ही फसल का हमेशा उत्पादन करते है तो , खेत की उत्पादन क्षमता घट जाती है , जिससे फसल की पैदावार भी कम हो जाती है।  जिसके कारण जमीन में कई तरह के विषैले गुण भी उत्पन्न हो जाते है।  हमें जमीन की भौतिक और जैविक स्थिति में संतुलन बनाये रखने के लिए फसल चक्र के अनुसार खेती करनी चाहिए।  जिससे आप बेहतर तरीके से फसल का उत्पादन कर सकते है।  इसकी वजह से खेत की उत्पादन क्षमता और उर्वरक क्षमता का संतुलन हमेशा बना रहता है।

क्या है फसल चक्र के लाभ  

  • किसान फसल चक्र को अपना कर बेहतर तरीके से फसल का उत्पादन कर सकते है।
  • फसल चक्र के द्वारा खेत की रासायनिक, भौतिक और जैविक गुणों को अच्छा किया जा सकता है।
  • किसान अगर फसल चक्र के अनुसार खेती करते है तो जमीन में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ सकती है।  जिससे फसल का उत्पादन अच्छे से किया जा सकता है।
  • जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ानें में इस फसल चक्र की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • फसल चक्र अपनाने से खेत में खरपतवार कम उगते है। जिससे फसल की पैदावार अच्छी होती है।
  • किसान अगर फसल चक्र के माध्यम से खेती करते है तो भूमि में जल को सोखनें की क्षमता बढ़ जाती है। जिससे फसल में रोग और खरपतवार का प्रभाव कम होता है।
  • फसल चक्र अपनाने से किसान भाइयों को ज्यादा सिचाई की जरुरत नहीं पड़ती है।

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निष्कर्ष 

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है।  हम आप तक कृषि से जुडी सभी छोटी – बड़ी जानकारी आसानी से व सरल भाषा में उपलब्ध करवाते है।  इसके आलावा भारत में हम किसान हितों को ध्यान में रखकर बेहतर तरीके के Best Quality Pesticide Manufacturers Products कीटनाशक भी बनाते है , जिससे प्रयोग से किसान भाई अपने फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकते है और इसमें लगने वाले हानिकारक रोगों , कीटों , खरपतवार को खत्म कर सकते है।  आप हमारे कीटनाशक को आसानी से खरीद भी सकते है। इसके लिए आपको हमारे पास बस एक कॉल (+91 – 9999570297 ) करने की जरूरत है।  हमारे कीटनाशक को अब आप ऑनलाइन तरीके से अपने घर माँगा सकते है।  हम भारत में सबसे बेहतर तरीका का कीटनाशक प्रदान करते है|