अमरुद की खेती भारत में कई वर्षों से होती आ रही है।  इसकी खेती फलों के रूप में की जाती है , जिसे हम माइरेटेसी कुल का सदस्य मानते है।  इसकी बागवानी भारत के कई राज्यों में की जाती है।  अमरुद में विटामिन “सी” की मात्रा काफी अधिक पाया जाता है इसीलिए लोग बड़े चाव से इसे खाते है। अमरुद में उत्पादकता, सहनशीलता तथा जलवायु के प्रति सहिष्णुता अधिक पाई जाती है , यही कारण है की अमरुद अन्य फल के मुकाबले सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।  अमरुद की खेती के लिए अधिक संसाधन की जरूरत नहीं पड़ती है , लेकिन फिर भी अमरुद अच्छी पैदावार देता है , जिससे किसान इसकी खेती करके अच्छा पैसा भी कमा सकते है।

दोस्तों अगर हम अमरुद की बात करें तो इसकी खेती भारत के अलावा अमेरिका और वेस्ट इंडीज़ जैसे देशों में की जाती है। आज के समय के हिसाब से भारत में अमरुद की खेती अच्छे तरीके से की जा सकती है।  अगर हम के खेती की बात करें तो आम , केला , नीबूं के बाद सबसे ज्यादा अमरुद की खेती की जाती है।  इसके साथ ही किसान भाइयों भारत के अमरुद की मांग विदेशों में भी लगातार बढ़ रही है , जिससे आप आज के समय में इसकी खेती करके अच्छा पैसा कमा सकते है।  अमरुद में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते है , जिससे इसका मुख्य इस्तेमाल दातों से जुडी बीमारी में किया जाता है। अगर आप नियमित रूप से इसके पत्ते का सेवन करते है तो दाँत में कीड़ा लगने की संभावना भी कम होती है।

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भारत में अमरुद की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, जलवायु और तापमान

किसान भाइयों जब भी हम किसी फसल की बुवाई करने जाते है तो उसका प्रथम चरण मिटटी के चुनाव को लेकर होता है।  अगर आप सही तरीके से मिटटी का चुनाव नहीं करते है तो पैदावार भी काफी कम होगी।  इसलिए हमेशा फसल की बुवाई से पहले मिट्टी के बारे में अच्छे से जान लें और अगर सही तरीके से इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है तो आप नियमित रूप से हमारे इस ब्लॉग को पढ़कर जानकारी हांसिल कर सकते है।

किसान भाइयों अगर अगर आप अमरुद की खेती करने जा रहें है तो इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। अगर इसकी खेती आप क्षारीय मिटटी में करते है तो उकठा रोग लगने की सम्भवना ज्यादा होती है। किसान भाइयों इसकी खेती के लिए भूमि का P.H. मान 6 से 6.5 के मध्य ही रहना चाहिए।  जिससे इसकी पैदावार अच्छे तरीके से किया जा सके।

जलवायु

किसान भाइयों अमरुद के पौधे के लिए उष्ण कटिबंधीय जलवायु सबसे अच्छा माना जाता है।  इसकी खेती अधिक शुष्क और अर्ध शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों आसानी से की जा सकती है। इसके पौधे ठण्ड और गर्म दोनों तरह के मौसम को सहन कर लेते है लेकिन अधिक वर्षा इसके पौधे को नुकसान पहुँचाती है। ठण्ड के मौसम में गिरने वाला पाला अमरुद के पौधे को नुकसान पहुँचाता है , इसके साथ ही किसान भाइयों इसके पौधे को 30 डिग्री तथा न्यूनतम 15 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है।  अगर आप बताये हुए तापमान और जलवायु के हिसाब से खेती करते है तो बेहतर तरीके से पैदावार देखनें को मिल सकता है।

अमरुद की उन्नत किस्में (Guava Improved Varieties)

इलाहाबादी सफेदा

इस अमरुद की खेती सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में सबसे ज्यादा की जाती है। इस किस्म के पौधे का आकार काफी बड़ा और लम्बा होता है।  जब यह पाक जाते है तो पूरी तरह से पीला दिखाई पड़ने लगता है।  अगर हम इसके वजन की बात करें तो इसका वजन 150 ग्राम से लेकर 250 ग्राम तक होता है। अगर आप इलाहाबादी अमरुद की खेती करते है तो एक साल में 80 KG तक पैदावार आराम से कर सकते है।

आर्क मृदुला

इस किसम के पौधे देखने में ही बड़े लगते है , इस बीज से अमरुद की शाखाएं भी अधिक निकलती है। आर्क मृदुला के पौधे भी अधिक मात्रा में पैदावार देते है।  जब भी इसके पौधे से फल निकलता है तो उसका रंग पीला और फल का आकार गोल होता है, जिसका भीतरी भाग सफ़ेद होता है , इसके पौधे भी पूर्ण विकसित होते है।  अगर आप इस अमरुद के बीज का प्रयोग करके खेती करते है तो निश्चित रूप से आपको अच्छी पैदावार देखनें को मिलेगी।

पंत प्रभात

अमरुद के इस पौधे की लम्बाई ज्यादा नहीं होती है।  इस पौधे से निकलने वाले फल का आकर भी चौड़ा और बड़ा होता है , इसका बाहरी रंग पीला और अंदर का रंग सफ़ेद होता है।  इस किस्म के पौधे से भी अधिक पैदावार देखी जा सकती है।  किसान भाई अगर इस किस्म के हिसाब से खेती करते है तो पैदावार काफी अच्छी देखी जा सकती है।

भारत में कैसे की जाती है अमरुद के खेत की तैयारी

किसान भाइयों जब भी अमरुद के पौधे अच्छे से विकसित हो जाते है तो पैदावार भी अच्छी देते है।  इसलिए इसके पौधे को लगाने से पहले हमें खेत को अच्छी तरफ से तैयार कर लेना चाहिए। इसकी खेती करने के लिए पहले हमें अच्छे से जुताई करना चाहिए और कुछ दिनों के लिए खेत को खुला छोड़ देना चाहिए। आप चाहें तो गोबर के खाद का प्रयोग कर सकते है। खाद डालनें के बाद आप खेत की अच्छे से जुताई कर सकते है।  इसके बाद खेत में पानी लगा सकते है और पानी सुख जाये तो खेत की फिर से जुताई कर दें।  इससे खेत की मिटटी भुरभुरी हो जाती है और पैदावार भी काफी अच्छी होती है।

किसान भाइयों को इसके बाद 5 से 6 मीटर का गड्ढा खोदकर उसमें अमरुद के पौधे को लगा देना चाहिए।  इसकी रोपाई करने से पहले किसान भाई गड्ढे में गोबर के सड़े हुए अवशेष को भी दाल सकते है।  इसके अलावा जब भी आप पौधे की निराई गुड़ाई करें तो नीम  की खली डाल दें , इससे पौधे का विकास तेजी से होता है।  आप चाहें तो इसके लिए रासायनिक खाद का भी प्रयोग कर सकते है।

जानिए कब किया जाता है भारत में अमरुद की खेती

अमरुद के पौधे को हम बीज और पौधा दोनों ही तरीके से लगा सकते है। अगर आप खेतों में अमरुद की खेती करने जा रहें है तो बीजो की रोपाई के अपेक्षा पौध रोपाई से जल्द पैदावार दे सकती है।  इसके पौधे की रोपाई के लिए मार्च और जुलाई का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।  जहां पर सिचाई की व्यवस्था होती है किसान वहां पर इसकी खेती मार्च के महीने में कर सकते है और जहां सिचाई की व्यवस्था नहीं होती वहां इसकी खेती जुलाई और अगस्त के महीने में की जाती है। अमरुद के पौधे को लगते समय शाखा के बीच की दुरी का ध्यान रखें।

अमरूद के पौधे की सिंचाई

किसान भाइयों इसका पौधा शुष्क जलवायु वाला होता है।  इसलिए इसके पौधे को कम सिचाई की जरूरत पड़ती है।  अगर आप ठण्ड के मौसम में इसके फसल को पाना चाहते है तो उसके लिए आप 4 -5 पानी गर्मी के मौसम में दें सकते है।  ठण्ड के मौसम में अमरुद के पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है , आप चाहें तो ठण्ड के मौसम में 2 -3 सिचाई इसके पौधे को कर सकते है।

अमरुद के फलो की तुड़ाई, पैदावार और लाभ

अमरुद के पौधे को रोपाई करने के दो से तीन साल के बाद तुड़ाई कर सकते है।  इसका पूर्ण रूप से विकसित पौधा दो से तीन पैदावार दे सकता है। जब भी अमरुद के पौधे पर फल का रंग पीला दिखाई पड़ने लगे आप तुड़ाई कर सकते है।  किसान भाइयों आप एक एकड़ खेत में अमरुद के 500 -600 पौधे लगा सकते है।  आज के समय में अमरुद की मांग भी बाजारों में काफी ज्यादा है।  जिसकी खेती करके किसान अच्छा पैसा कमा सकते है।

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निष्कर्ष

किसान भाइयों आज के इस ब्लॉग में हमनें जाना की अमरुद की खेती कैसे की जा सकती है।  आशा है की आप सभी को हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा।  आप हमारे इस ब्लॉग को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर भी कर सकते है।  जीकेन Top Agricultural Chemical companies in india में से एक है। अगर आप GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक को खरीदना चाहते है तो हमें कॉल (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।