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नमस्कार किसान भाइयों आज हम आपको धनिया की खेती के बारें में बतानें जा रहें है।  धनिया की खेती भारत में लगभग सभी राज्यों में की जाती है।  यह एक तरह की मसाले वाली फसल है।  इसकी खेती ज्यादातर बारिश के मौसम में की जाती है लेकिन इन दिनों सब्जी उगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।  क्योंकि बरसात के मौसम में हमेशा बाढ़ की स्थिति बनी रहती है।  जिसके कारण फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है। वहीँ अगर इस समय देखा जाये तो सबसे महंगा कुछ बिकने वाला है तो वह धनिया ही है। किसान भाइयों अगर आप बरसाती धनिया की खेती करते है तो अत्यधिक मुनाफा कमा सकते है।  बरसात के मौसम में धनिया की मांग भी काफी अधिक रहती है। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे की धनिया की खेती कैसे की जाती है और किसान कैसे इससे मुनाफा कमा सकते है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आये तो ब्लॉग को शेयर भी जरूर करें।

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है।  हम आप तक खेती – बड़ी से जुडी जानकारी प्रदान करते है।  इसका अलावा भारत में हम सबसे अच्छा कीटनाशक भी प्रदान करते है।  आप हमारे कीटनाशक का प्रयोग करके अपने फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकते है , इसके आलावा आप इसमें लगने वाले रोगों ,कीड़ों और कवक को भी खत्म कर सकते है। अगर आप हमारे कीटनाशक को खरीदना चाहते है तो हमें कॉल (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।

धनिया मसालों वाली फसल में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती है।  इसके दानें में एक तरह का वाष्पशील पदार्थ पाया जाता है , जिससे हमारा खाना स्वादिष्ट और सुगन्धित बनता है।  भारत में धनिया की सबसे ज्यादा खेती  राजस्थान, आन्ध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटक जैसे राज्यों में की जाती है।  वहीँ अगर हम विदेशों की बात करें तो इसका उत्पादन  श्रीलंका, जापान, सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका व मलेशिया में भी होता है।

इसके दानें को पीसकर सुगन्धित बनाने का काम किया जाता है।  वहीँ वाष्पशील तेल से सुगन्धित द्रव्य व खुशबूदार साबुन बनाने में किया जाता है।  इसके आलावा और भी कई तरह की चीज बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।  गांव में इसकी पत्तियों से चटनी तथा शाक सब्जी व सुप और सलाद को स्वदिष्ट बनाने के काम में लाया जाता है।  यदि किसान इसकी खेती को बेहतर तरीके से करें तो अच्छा पैसा कमा सकते है।  आज के इस ब्लॉग में धनिया के बेहतरीन तरीके से की जानें वाली खेती का उल्लेख है।

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Contents

उपयुक्त जलवायु

धनिया की खेती वैसे तो हम सभी मौसम में करते है लेकिन इसके लिए शुष्क व ठंडा मौसम सबसे अनुकूल होता है।  धनिया के बीजों के लिए 25 से 26 सेंटीग्रेट तापमान होना जरुरी है।  धनिया की फसल को शीतोष्ण जलवायु की जरूरत होती है। वहीं अगर हम बात करें नुकसान की तो धनिया की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पाले से होता है।  इसलिए पाले के रोकथाम के लिए हमें धनिया को हमेशा सींचते रहना चाहिए।

भूमि का चयन

किसान भाइयों धनिया के फसल के लिए अच्छे जल निकासी व दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। धनिया की फसल के लिए क्षारीय एवं लवणीय भूमि सबसे ज्यादा हानिकारक मानी जाती है।  इसलिए कभी भी किसान भाइयों को इस तरह की भूमि पर खेती नहीं करना चाहिए।  धनिया की फसल के लिए मिट्टी का पीएच मान  6.5 से 7.5 होना चाहिए|

खेत की तैयारी

अगर किसान भाई आप धनिये की खेती सिंचित क्षेत्र में कर रहें है तो जुताई के समय खेत में पर्याप्त जल होना चाहिए , अगर पर्याप्त पानी नहीं है तो भूमि की तैयारी पलेवा देकर करनी चाहिए।  ऐसा करने पर जमीन के ढेले पूरी तरह से समाप्त हो जायँगे और खरपतवार भी ज्यादा नहीं उगेंगे। धनिया की खेती के लिए किसान भाइयों को आड़ी-खड़ी जुताई करवाना चाहिए।

बुवाई का समय

धनिया की खेती के लिए रबी का मौसम सबसे अच्छा माना जाता है।  आप इसकी खेतो अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से लेकर नवम्बर के महीने तक कर सकते है।  धनिया की खेत अगर समय से किया जाये तो काफी फायदा होता है। हरे पत्ते के लिए आप धनिया की खेती दिसंबर के महीने में कर सकते है। पाले से बचाने के लिए आप धनिया की खेती नवम्बर के दूसरे सप्ताह में कर सकते है।

बुवाई की विधि

किसान भाई जब भी आप धनिया की बुवाई करें सावधानी पूर्वक इसे हल्का सा रगड़ लें और बीजों को दो भागों में तोड़कर रख लें।  धनिया की बुवाई सीड ड्रील  कतारों के माध्यम से करनी चाहिए। वहीँ कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर एवं पौधे से पौधे की दूरी 7 से 10 सेंटीमीटर होनी चाहिए। धनिया की बुवाई पंक्तियों में करना सही होता है।  कभी भी इसके बीज को गहराई में नहीं बोना चाहिए।

खाद का समय व तरीका

असिंचित खेती करते समय उर्वरक की मात्रा फसल के आधार के रूप में देना चाहिए। वहीँ सिचित अवस्था में आप नाइट्रोजन की आधी मात्रा एवं फास्फोरस, पोटाश एवं जिंक सल्फेट की पूरी मात्रा बोने के पहले अंतिम जुताई के समय कर देना चाहिए।

सिंचाई प्रबंधन

धनिया की खेती करते समय इसकी पहली सिचाई 30 -35 दिनों के बाद करनी चाहिए।  दूसरी सिचाई 50-60 दिनों के बाद करनी चाहिए।   अगर धनिया के सिचाई की बात करें तो प्रत्येक सिचाई के लिए 1 महीने का अंतर होना चाहिए।  इससे फसल में रोग नहीं लगते है और पैदावार भी अच्छी होती है।

खरपतवार प्रबंधन

धनिया की फसल में जब भी खरपतवार दिखाई दें , सबसे पहले इसकी गुड़ाई करनी चाहिए। अगर फिर भी खरपतवार खत्म न हो तो इसमें GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बना कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए।  इससे इसके खरपतवार जल्द खत्म हो जाते है और पैदावार में वृद्धि होती है।

रोग एवं नियंत्रण

उकठा उगरा विल्ट

यह रोग ज्यादातर सभी फसलों में फैलता है।  जब भी मौसम में बदलाव होता है तभी यह रोग दिखाई पड़ता है।  इसके कारण धनिया की ऊपरी पत्तियां और पौधे मुरझानें लगते है। जब इस रोग का प्रकोप ज्यादा होता है तो पौधा सुख जाता है।  इसके जड़ों के पास फाड़ कर देखने पर अंदर काले, कत्थई या लाल रंग के धागों जैसे कवक दिखाई पड़ता है।  यह रोग ज्यादातर फ्यूजेरियम आक्सीस्पोरम एवं फ्यूजेरियम कोरिएनड्री कवक के द्वारा फैलते है।

बचाव -:

अगर आपके भी धनिया की फसल में इस तरह का रोग दिखाई पड़ रहा है तो आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बना कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है।  यह फसल में अंदर तक जाकर कीड़ों को खत्म करता है और पैदावार को बढ़ता है।  GEEKEN CHEMICALS उकठा रोग के लिए लेकर आया है Kenzim (Carbendazim 50% WP) जिसका प्रयोग करने के कुछ दिन बाद ही आपको इसका असर दिखाई पड़ने लगेगा।

चूर्णिल आसिता भभूतिया

यह रोग धनिया के पौधे में  मटमैले सफेद रंग के धब्बे के रूप में दिखाई पड़ते है।  जिसके कुछ दिन के बाद यह तने और फलियों पर भी दिखाई पड़ते है। जब वातावरण अनुकूल होता है तो यह धब्बे बढ़ने लगते है और पूरे पौधे को अपनी चपेट में ले लेते है।  जिसकी वजह से किसान भाइयों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है।  कुछ दिन के बाद इस रोग से ग्रसित पौधे की वृद्धि रुक जाती है और वह बौने रह जाते है जिसकी वजह से फलियां भी कम लगती है। चूर्णिल आसिता रोग इरीसिफी पॉलीगॉन कवक के द्वारा ही पुरे पौधे में फैलते है।  जब इनका प्रभाव अधिक होता है तो पूरी फसल पीली पड़कर सुख जाती है।

बचाव  

इस तरह के रोग पूरी फसल को खत्म कर देते है अगर आप इससे अपने फसल को बचाना चाहते है तो इसके लिए आपको GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक का प्रयोग करना होगा जिससे यह रोग पूरी तरह खत्म हो जायँगे।  GEEKEN CHEMICALS इस रोग के लिए लेकर आया है Bonanza​ (Thiophanate Methyl 70% WP)कीटनाशक जो सबसे ज्यादा तागतवर है और पौधे में लगने वाले रोगों को जल्द से जल्द खत्म करता है।  GEEKEN CHEMICALS BEST Pesticides Manufacturers in Uttar Pradesh कंपनी में से है।

पाले का प्रभाव 

धनिया की खेती अगर आप दिसम्बर महीने में करते है तो , इस महीने में पाले का खतरा बना रहता है। ठण्ड के मौसम में  तापमान भी शून्य डिग्री तक आ जाता है जिसके कारण ओस की बूदें कणों में बदल जाती है और यह कण पौधे में जम जाते है।  पाला ज्यादातर दिसंबर से लेकर फरवरी के महीने तक लगता है।  अगर आप इससे अपने फसल को बचाना चाहते है तो फसल की बुवाई नवम्बर महीने में कर दें।  यदि आपको लग रहा है कि पाला पड़ सकता है तो फसल की सिचाई कर दें।  इसके अलावा किसान कूड़े को जलाकर धुआँ कर सकते है। जिससे फसल की सुरक्षा की जा सकती है।

धनिया के फसल कटाई

धनिया के फसल की कटाई समय पर ही करनी चाहिए।  जब भी आपकी धनिया की फसल दबानें पर मध्यम कठोर तथा पत्तिया पीली पड़ने लगे या फिर धनिया डोड़ी का रंग हरे से चमकीला भूरा या पीला होने लगे तब इसकी कटाई कर देना चाहिए।  अगर आप इसके फसल की कटाई देर से करंगे तो फसल के ख़राब होने की संभावना ज्यादा रहती है। जिसकी वजह से किसान भाइयों को बाजार में उनके फसल के मुताबिक कीमत भी नहीं मिल पाती है। कृषि एक्सपर्ट बताते है कि अच्छे फसल उत्पादन के लिए आपको 50 प्रतिशत धनिया डोड़ी का हरा से चमकीला भूरा कलर होने पर कटाई कर देना चाहिए।

पैदावार

दोस्तों आज के समय में धनिया की मांग बहुत बढ़ गयी है।  अब खाने से लेकर अलग – अलग चीजों में धनिया का प्रयोग किया जा रहा है। जिस वजह से अगर आप धनिया की खेती करते है तो अच्छा पैसा कमा सकते है।  बाजार में धनिया की कीमत भी अच्छी मिलती है।  भारत के ज्यादातर किसान पछेती धनिया की खेती करना पसंद करते है।

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निष्कर्ष 

आज के इस ब्लॉग में हमने जाना कि धनिया की खेती कैसे की जाती है और  इसमें लगने वाले रोगों को कैसे खत्म कर सकते है।  आशा है कि किसान भाइयों को हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा।  आप इसे अपने सोशल मीडिया के माध्यम से जरूर शेयर करें।  इसके आलावा आप GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक को अगर खरीदना चाहते है तो हमें कॉल (+91 – 9999570297)कर सकते है। हम भारत में सबसे अच्छा कीटनाशक प्रदान करते है।