सभी फलों में सेब सबसे प्रमुख फल है , जिसका प्रयोग हमें अनेक बीमारी से छुटकारा दिला सकता है।  यदि आप प्रतिदिन सेब का सेवन का करते है तो , आपके शरीर में अलग तर्क के ऊर्जा की अनुभूति होगी।  सेब दिखने में लाल और हरे रंग का होता है , जिसकी खेती सबसे ज्यादा मध्य एशिया में की जाती है।  आज के समय में यूरोपीय देश भी सेब की खेती करने में पीछे नहीं है , यहां के किसान भी सेब का बहुत अच्छा उत्पादन कर रहें है।  सेब को हम वैज्ञानिक की भाषा में मेलस डोमेस्टिका कहते है।  भारत में भी अब किसान सेब की खेती की तरफ लगातार आगे बढ़ रहें है।  लेकिन अब भी बहुत से ऐसे किसान है जिन्हे इसकी खेती के बारें में पता नहीं है , ऐसे में आज हम अपने इस ब्लॉग के माध्यम से बतानें वाले है की सेब की खेती कैसे और किस जलवायु में की जाती है।  किसान भाइयों अगर आप सेब की खेती करने जा रहें है तो इस ब्लॉग को पूरा पढ़ें और अच्छा लगें तो शेयर करें।

आप यह ब्लॉग GEEKEN CHEMICALS के माध्यम से पढ़ रहें है।  हम आप तक कृषि जगत से जुडी जानकारी को पहचानें का काम करते है।  अगर आप अपने फसल का अच्छे से उत्पादन चाहते है तो नियमित रूप से हमारे ब्लॉग को पढ़ें और GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें कीटनाशक का प्रयोग करें , जिससे फसल का उत्पादन बेहतर हो सके। GEEKEN  Top Agricultural Chemical Companies in India में से एक है।

किसान भाइयों सेब की खेती सबसे ज्यादा ठन्डे प्रदेशों में की जाती है। अगर हम भारत की बात करें तो इसकी खेती सबसे ज्यादा हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में की जाती है। हमारे कृषि वैज्ञानिकों ने अब सेब की ऐसी प्रजाति को बनाई है जिसे हम मैदानी भागों में भी आसानी से ऊगा सकते है।  सेब का प्रयोग हम खानें के अलावा जूस पीने के लिए भी करते है।  लेकिन इसकी खेती के बारें में अच्छे से जानकारी न होने के कारण , हम इसकी खेती नहीं कर पाते है अब GEEKEN CHEMICALS आपके लिए इससे जुडी जानकारी आसानी से उपलब्ध करवाएगा।

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Contents

भारत में सेब की खेती कैसे की जाती है

किसान भाइयों सेब की खेती हम गुच्छे के रूप में करते है।  इसका पौधा देखने में झाड़ीनुमा होता है , सेब कई किस्म के होते है कहीं पर लाल।  कहीं पर पीले , कहीं पर हरे रेंज के होते है।  इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है , इसे हम 1500 से 2700 मीटर की उचाई पर आसानी से ऊगा सकते है।  लेकिन किसान भाइयो सेब की खेती करने से पहले आपको जलवायु और तापमान की भी जानकारी होना बहुत जरुरी है।  जिसके जानकारी हम आपको नीचे देने जा रहें है।

भारत में सेब की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी जलवायु और तापमान

किसान भाइयों अगर आप किसी भी फसल की खेती करने जा रहें है तो इसके लिए मिट्टी का चुनाव सही से कर लें , जिससे फल की पैदावार अच्छे से की जा सकें। अगर आप सेब की खेती की खेती करने जा रहें है तो इसके लिए गहरी उपजाऊ और दोमट मिट्टी की जरूरत पड़ती है।  किसान भाइयों आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की सेब की खेती के लिए जमीन ऐसी होनी चाहिए जहां जलभराव की समस्या ज्यादा न हो ,ज्यादा जलभराव की वजह से पौधे में रोग लगनें लगते है। कभी भी सेब की खेती गहराई तथा चट्टान वाली मिट्टी में नहीं करना चाहिए , इससे पौधे का विकास रूप जाता है।  अगर सेब की खेती के लिए P.H. मान की बात करें 5 से 7 के मध्य होना चाहिए |

भारत में सेब की खेती के लिए जलवायु

किसान भाइयों सेब की खेती के लिए जलवायु का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए , क्योंकि सेब की खेती सबसे ज्यादा ठंडे जलवायु वाले मौसम में किया जाता है। ठण्ड के मौसम में सेब के पौधे को विकास के लिए अच्छे से धूप की जरुरत होती है।  इसके पौधे को सबसे ज्यादा नुकसान ठंड में गिरनें वाले पालें से होता है अगर ज्यादा बारिश होती है तो फिर भी इसके पौधे को नुकसान पहुँच सकता है।  बारिश के मौसम में सेब के पौधे को फफूंदी जनित रोग का खतरा बना रहता है।  किसान भाइयों हमें यह ध्यान रखना है कि ज्यादा बारिश भी इसके पौधे को नुकसान पंहुचा सकता है।  सेब के पौधे के लिए 20 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है और अगर फल पकनें वाला है तो 7 डिग्री तापमान का होना जरुरी है।

भारत में सेब की उन्नंत किस्में

सन फ्यूजी किस्म के सेब

किसान भाइयों ऐसे सेब बहुत ही आकर्षित दीखते है।  इसमें धारीदार गुलाबी रंग के सेब प्रमुख है।  यह सेब खानें में मीठा , ठोस और कुरकुरा होता है।  जहां पर सेब के पकनें में ज्यादा समय लगता है वहां हम इसकी खेती आसानी से कर सकते है।  लेकिन बीज का चुनाव बहुत ही सावधानी से करना चाहिए , कभी -कभी बीज के गलत चुनाव की वजह से पूरी फसल या पौधा ख़राब हो जाता है।

रैड चीफ किस्म के फल

इस किस्म का पौधा देखनें में बहुत छोटा होता है , इसलिए इसे कम से कम 5 फीट की दूरी पर लगाते है। यह सेब लाल रंग के होते है और इनपर बारीक़ धब्बे दिखाई पड़ते है।  यह किस्म सेब के जल्दी पैदावर देने के लिए जाना जाता है।  अगर किसान भाई सेब की जल्द पैदावार करने चाहते है तो इस बीज का चुनाव कर सकते है।

रॉयल डिलीशियस किस्म के पौधे

सेब का यह किस्म भी लाल रंग का होता है और फल गोल आकृति के होते है , लेकिन फल का ऊपरी भाग हरे रंग का होता है।  इसके फल पकनें में ज्यादा समय लेते है लेकिन पैदावार काफी अच्छी होती है।  इसमें फल गुच्छे की तरह लगते है।  इसलिए किसान भाई अगर सेब की खेती करने जा रहें इन बीज का चुनाव कर सकते है।

भारत में सेब के खेत और पौधों को कैसे तैयार किया जाता है

किसान भाइयों सेब की खेती करने से पहले खेत की अच्छे से जुताई करना चाहिए।  अगर सेब की खेती करने जा रहें है तो दो से तीन गहरी जुताई करनी चाहिए , जिसके बाद खेत में रोटावेटर चलवा देना चाहिए।  किसान भाइयों को एक चीज का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए खेत में कभी भी पानी न लगने पाए , इसके लिए जुताई करते समय खेत का समतल होना जरुरी है।  सबसे अंत में 10 से 15 फीट की दुरी पर गड्ढे को तैयार कर लेना चाहिए।

किसान भाइयों खरपतवार कम उगे इसके लिए आप गोबर के खाद का प्रयोग कर सकते है। अगर खरपतवार ज्यादा उग रहें है, तो आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें खरपतवारनाशी का प्रयोग कर सकते है। जीकेन Best Agrochemical Company In India में से एक है।  आप जब भी इसके पौधे को लगाए तो हल्का सा पानी जरूर डाल दें , इससे पौधे को सूखनें की संभावना काम होती है।

किसान भाइयों यह भी ध्यान रखना है की जिन पौधे को हम लगानें जा रहें है , उनकी तैयारी भी हमें पहले से करनी होगी।  हम इसके पौधे को कलम और बीज के माध्यम से तैयार करते है। इसके अलावा आज के समय में सेब के पौधे को सरकारी रजिस्टर्ड नर्सरी से भी ख़रीदा जा सकता है।

भारत में सेब के पौध का रोपण

किसान भाइयों भारत में सेब के पौधे की रोपाई गड्ढे में की जाती है।  इसके लिए आपको एक उचित दूरी के अनुसार गड्ढे का चुनाव करना होगा।  जिसके बाद आप उन गड्ढे में सेब के पौधे को लगा सकते है। अगर आप चाहते है की गड्ढे में ज्यादा नमी बने रहें तो , इसके लिए नारियल के छिलके को डाल सकते है।  इससे रोग और कीट लगने की संभावना कम होती है।

किसान भाइयों को यह भी ध्यान रखना होगा की नर्सरी से लाये गए पौधे कम से कम एक साल पुराने और हरे भरे होना चाहिए।  सेब के पौधे की रोपाई हम जनवरी और फरवरी के अंत में करते है। कृषि एक्सपर्ट की मानें तो ऐसा करने से पौधों को ज्यादा समय तक उचित वातावरण मिलता है और पौधे विकास भी तेजी से करते है।

भारत में कब की जाती है सेब के पौधे की सिचाई

किसान भाइयों सेब के पौधे की रोपाई ठंड के मौसम में की जाती है , इसलिए इसके पौधे को ज्यादा सिचाई की जरूरत नहीं पड़ती है।  लेकिन पौधे को लगानें के बाद एक बार सिचाई कर देना चाहिए।  अगर ठण्ड का मौसम है तो 2 -3 सिचाई पौधों के लिए पर्याप्त होते है , लेकिन गर्मी के मौसम में इन्हे हर हफ्ते सिंचाई करना चाहिए। अगर बारिश का मौसम है तो इसकी सिचाई पौधे के आवश्यकता के अनुसार करनी चाहिए।  अगर आप बताए हुए तरीके से पौधे की सिचाई करते है तो पैदावार अच्छी देखनें को मिल सकती है।

कब करें उर्वरक का प्रयोग

किसान भाइयों किसी भी फसल को उर्वरक तभी देना चाहिए , जब जरूरत हो नहीं तो पौधे सूखने लगते है।  इसके लिए किसान भाई जब गड्ढों को तैयार करते समय 10 से 12 किलो गोबर के खाद का प्रयोग करना चाहिए।  यह मात्रा पौधे को हमेशा देना चाहिए , जैसे – जैसे पौधे बड़े होने लगे उसे हिसाब से उर्वरक की मात्रा भी बढ़ा देनी चाहिए।  इसके अलावा अगर पौधे में खरपतवार या कीट ज्यादा दिखाई पड़ रहे है तो इसके लिए Top fertilizer company in India के द्वारा निर्मित रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है।  अगर आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें इस प्रोडक्ट को खरीदना चाहते है तो हमारे इस नंबर पर कॉल (+91 – 9999570297) कर सकते है।

भारत में कब की जाती है सेब के फलो की तुड़ाई

किसान भाइयों आप सेब के फल को 130 से 140 दिनों के बाद तोड़ सकते है।  जब भी फल अच्छे से दिखाई देने लगें तब हम इसकी तुड़ाई कर सकते है।  इसके फल को तोड़ते समय यह ध्यान रखें की इसकी तुड़ाई थोड़ा डंठल के साथ करनी चाहिए , इससे फल हमेशा ताजे बनें रहते है।  जब आप फल की तुड़ाई कर लें तो रंग और आकार साथ ही चमक के आधार पर अलग कर लेना चाहिए।  इसके बाद आप इन्हे बाजार में बेचनें के लिए भेज सकते है।

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निष्कर्ष

किसान भाइयों आज के इस ब्लॉग में हमने सेब की खेती कैसे करें और इसकी सिचाई कब करनी चाहिए इसके बारें में जाना।  आशा है कि आप सभी को हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा।  आप हमारे इस ब्लॉग को अपने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर कर सकते है।  इसके अलावा अगर आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा निर्मित कीटनाशक खरीदना चाहते है तो हमें (+91 – 9999570297) भी कर सकते है।