किसान भाइयों बाजरा भी हमारी प्रमुख फसलों में से एक है , यह मोटे दानें वाली फसल में गिना जाता है। बाजरे की उन्नत खेती के लिए हमें आज के समय में नई तकनीकी अपनानें की जरुरत है। भारत में सबसे ज्यादा बाजरे का उत्पादन किया जाता है। अगर हम भारत की बात करें तो भारत में 85 लाख हेक्टेयर के क्षेत्रफल में इसकी खेती की जाती है। भारत में बाजरे की सबसे ज्यादा खेती महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और उत्तर प्रदेश राज्यों में की जाती है। इसकी खेती ज्यादातर शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में की जाती है। इसके अलावा बाजरा पशुओं को खिलाने के लिए प्रमुख चारा फसलों में से एक है। आज के इस ब्लॉग में हम जानेंगे की बाजरा की खेती कैसे की जाती है। किसान भाइयों आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़ें और अच्छा लगें तो शेयर भी जरूर करें।

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किसान भाइयों गेहूं और चावल की तुलना में बाजरे का उत्पादन काफी अच्छा होता है। बाजरे में सबसे ज्यादा मात्रा में आयरन पाया जाता है जिसे खानें से हमारे शरीर में तागत बनी रहती है। बाजारें के अंदर सबसे ज्यादा कैल्शियम फास्फोरस, प्रोटीन, हाइड्रोरासायनिक अम्ल और खनिज लवण सबसे ज्यादा पाया जाता है। जिसे अगर आप अपने जानवरों को देते है तो इससे उनके दूध देने की क्षमता में वृद्धि होती है।

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भारत में बाजरे की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव

किसान भाइयों बाजरे की खेती के लिए हमें सही तरीके से मिट्टी का चुनाव करना चाहिए। अगर मिट्टी का सही तरीके से चुनाव नहीं करेंगे तो फसल पैदा होने से पहले ही सूखनें लगती है। इसलिए इसकी जानकारी के लिए आप नियमित GEEKEN CHEMICALS के ब्लॉग को पढ़ते रहें। किसान भाइयों आपको बता दूँ की बाजरे की खेती के लिए हमें रेतीली बलुई मिट्टी की जरुरत पड़ती है लेकिन आज के समय में बाजरे की खेती सभी तरह की मिटटी में की जाती है। किसान भाइयों बाजरे की खेती करते समय यह ध्यान रखें की खेत में ज्यादा पानी नहीं लगना चाहिए , इससे पेड़ में रोग लगने की सम्भावना ज्यादा होती है। इससे आपके बाजरे की फसल की पैदावार भी कम होगी। इसलिए आप मिट्टी का चुनाव सही तरीके से करें।

भारत में बाजरे की खेती के लिए जलवायु और तापमान

किसान भाइयों आज के समय में मौसम में अचानक से बदलाव हो रहें है , इसलिए आप मौसम को ध्यान में रखकर फसल की बुवाई करें। अगर आप बाजारें की बुवाई करने जा रहें है तो इसके लिए शुष्क और अर्धशुष्क जलवायु वाली मौसम में करें। जब भी बारिश का मौसम आये तो हमें फसल की बुवाई कर देना चाहिए और ठण्ड का मौसम आने से पहले ही काट लेना चाहिए। इसकी खेती के लिए 700 -800ML बारिश की जरूरत पड़ती है। जब भी पौधे पर सिट्टे आने लगे तो समझ जाये की पौधे में नमी ज्यादा है। अगर ऐसे समय में बारिश नहीं होती है तो फसल के दानें कमजोर होने लगता है। किसान भाइयों बाजरे की खेती के लिए 25 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है। जब पौधा विकास करने लगें तब इसे 30 से 35 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है। लेकिन इसकी पैदावर के लिए 40 डिग्री तापमान की जरूरत पड़ती है। किसान भाई अगर इस हिसाब से बाजरे की खेती करते है तो अवश्य ही अच्छी पैदावार देखनें को मिलेगी।

भारत में बाजरे के खेत की तैयारी

किसान भाइयों अगर आप बाजरे की खेती करने जा रहें है तो इसके लिए आपको सबसे पहले खेत की अच्छी तरह से जुताई करनी चाहिए। खेत को शुरू में सिर्फ दो जुताई करना चाहिए। जुताई करने के बाद आप खेत में गोबर के खाद का प्रयोग कर सकते है। गोबर के खाद का प्रयोग करने के बाद आप फिर से खेत की जुताई कर सकते है। अगर बारिश अच्छी हो जाये तो खेत की एक बार फिर से जुताई कर देनी चाहिए।

भारत में बाजरे की बुवाई का समय और तरीका

किसान भाइयों बाजरे की खेती पहली बारिश के मौसम में कर देनी चाहिए। अगर बारिश नहीं हुई है तो खेत में पानी लगा दें , जिसके बाद आप इसकी बुवाई कर सकते है। इसकी बुवाई के लिए मई – जून का मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। इसकी बुवाई भारत में दो तरीके से किया जाता है पहला खेत में बीज को छिड़ककर हल्की जुताई करके मिट्टी में मिलाया जाता है , जुताई इस हिसाब से करें की बीज जमीन के अंदर चली जाएँ। किसान भाई बाजरे के बुवाई की दूसरी विधि बीजों को मशीनों के द्वारा बोया जाता है। इसमें बीजों को कतारों में लगाया जाता है और सभी कतारों में एक से दो फिट की दूरी होनी चाहिए। इस तरीके में भी बीजों को सिर्फ 2 सेमी की गहराई में लगाना सही होता है।

बाजरे की सिंचाई कब करनी चाहिए

किसान भाइयों बाजरे की खेती के लिए हमें अधिक सिचाई की जरूरत नहीं पड़ती है , क्योंकि पूरी फसल बारिश के पर ही निर्भर है। किसान भाइयों बजारे के फसल की बुवाई करते समय हमें यह ध्यान रखना चाहिए की अगर बारिश ज्यादा समय तक न हों तो फसल की सिचाई कर देनी चाहिए। अगर इसके कुछ समय बाद भी बारिश न हो तो फसल के आवश्यकता के अनुसार सिचाई कर देना चाहिए। अगर आप इसके फसल को चारे के लिए ऊगा रहें है तो हर हफ्ते इसकी फसल को पानी देते रहना चाहिए। आज के समय में पशुओं को खानें के लिए यह सबसे अच्छी और सस्ती फसल है।

कब करें बाजरे के पौधों की निराई-गुड़ाई

किसान भाइयों बाजरे की फसल को ज्यादा निराई गुड़ाई की जरुरत नहीं पड़ती है। लेकिन अगर आप समय – समय पर इसकी निराई – गुड़ाई करते है तो फसल की पैदावार काफी अच्छी होती है। अगर आप समय – समय पर बाजरे की फसल की निराई – गुड़ाई करते है तो निश्चित ही फसल की अच्छी पैदावार देखनें को मिलेगी। अगर आप ऐसा करते है तो फसल में खरपतवार कम उगता है। आप इन खरपतवार को खत्म करने के लिए Best Agrochemical Company in India जीकेन कैमिकल्स के द्वारा निर्मित खरपतवारनाशी कैमिकल का प्रयोग कर सकते है।

कब की जाती है बाजरे के फसल की कटाई, पैदावार और लाभ

किसान भाइयों आज के समय में बाजरे की खेती सभी फायदें वाली फसलों में से एक है। अगर आप इसकी खेती सही तरीके से करते है तो निश्चित ही अच्छी पैदावार होगी। किसान भाइयों बाजरे की फसल 70 -80 दिन में तैयार हो जाती है। जब बाजरे का दाना कठोर हो जाएं और भूरा दिखाई पड़नें लगें तब इसकी कटाई कर देनी चाहिए। इसकी कटाई भी दो तरीके से की जाती है , पहली कटाई में हम पौधे को काटते है और दूसरी कटाई में सिट्टे को काटकर अलग कर दिया जाता है। आप इसे काटकर सूखा लें उसके बाद अपने जानवरों को खानें के लिए दे सकते है।

बाजार में भी किसान भाइयों इसकी मांग हमेशा रहती है , इसलिए बाजरे को भी फायदें वाली खेती में रखा गया है। आप अगर बाजारें की खेती करने जा रहें है तो हमारे इस ब्लॉग को पूरा पढ़ें और बताएं हुए नियम के अनुसार खेती करें। अगर फसल में खरपतवार , कीट , रोग आदि दिखाई पड़ें तो आपको Top Agrochemical Companies in India के द्वारा निर्मित कीटनाशक का प्रयोग अवश्य करें।

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निष्कर्ष

आज के इस ब्लॉग में हमनें जाना की बाजारें की खेती कैसे की जाती है। आशा है की किसान भाइयों को हमारा यह ब्लॉग खूब पसंद आया होगा। आप हमारे इस ब्लॉग को शेयर जरूर करें। GEEKEN CHEMICALS आपके लिए हमेशा इसी तरह से जानकारी लाता रहेगा। किसान भाइयों आप अपने फसलों के बेहतर उत्पादन के लिए हमारे कीटनाशक का भी प्रयोग कर सकते है। अगर आप इसे खरीदना चाहते है तो आज ही कॉल (+91 – 9999570297) करें।