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दोस्तो, भारत एक कृषि प्रधान देश है।  यहाँ खेती को बहुत ही महत्व दिया जाता है।  यहाँ किसानों की आधे से ज्यादा आजीविका इसी खेती पर ही निर्भर है। वैसे तो भारत में सभी तरह की फसलें उगाई जताई है लेकिन गेहू की खेती चावल और गन्ने के बाद प्रमुख है।  आज हम जानेंगे की गेहू की खेती कैसे करें और इसमें लगने वाले रोग कौन – कौन से है, इसके रोकथाम के लिए कौन सा उर्वरक प्रयोग कर सकते है।  तो दोस्तों , आइये लें चलते है आपको अपने इस ब्लॉग में और देते है गेहू से जुडी जानकारी।

दोस्तों , आप यह ब्लॉग Geeken Chemicals India Limited पर पढ़ रहें है। जीकेन केमिकल्स भारत के प्रतिष्ठित कृषि रासायनिक उर्वरक बनाने वाली कंपनी में से एक है।  जीकेन केमिकल्स लगातार भारत के सभी राज्यों मे खेती से जुड़े सभी तरह के रासायनिक केमिकल्स बनाता आ रहा है।

गेहूँ की खेती विश्व के प्रायः हर भाग में होती है. संसार की कुल 23 प्रतिशत भूमि पर गेहूँ की खेती की जाती है। गेहूँ विश्वव्यापी महत्त्व की फसल है। मुख्य रूप से एशिया में धान की खेती की जाती है, तो भी विश्व के सभी प्रायद्वीपों में गेहूँ उगाया जाता है। Geeken Chemicals India Limited  भारत में सबसे अधिक उर्वरक बेचने वाली कंपनी में से एक है।

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Contents

 भूमि का चयन (Land selection)

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गेहूँ सभी प्रकार की कृषि योग्य भूमियों में पैदा हो सकता है परन्तु दोमट से भारी दोमट, जलोढ़ मृदाओ में गेहूँ की खेती सफलता पूर्वक की जाती है। जल निकास की सुविधा होने पर मटियार दोमट  तथा काली मिट्टी में भी इसकी अच्छी फसल ली जा सकती है। कपास की काली मृदा में गेहूँ की खेती के लिए सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ती है। भूमि का पी.एच.मान 5 से 7.5 के बीच में होना फसल के लिए उपयुक्त रहता है क्योंकि अधिक क्षारीय या अम्लीय भूमि गेहूं के लिए अनुपयुक्त होती है।

 खेत की तैयारी (Farm preparation)

अच्छे अंकुरण के लिये एक बेहतर भुरभुरी मिट्टी की आवश्यकता होती है. समय पर जुताई  खेत में नमी संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। वास्तव में खेत की तैयारी करते समय हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि बोआई के समय खेत खरपतवार मुक्त  हो, भूमि में पर्याप्त नमी हो तथा मिट्टी इतनी भुरभुरी हो जाये ताकि बुवाई आसानी से उचित गहराई तथा समान दूरी पर की जा सके। खरीफ की फसल काटने के बाद खेत की पहली जुताई  मिट्टी पलटने वाले हल (एमबी प्लोऊ) से करनी चाहिए जिससे खरीफ फसल के अवशेष और खरपतवार मिट्टी मे दबकर सड़ जायें। इसके  बाद आवश्यकतानुसार 2-3 जुताइयाँ देशी हल-बखर या कल्टीवेटर से करनी चाहिए. प्रत्येक जुताई के बाद पाटा देकर खेत समतल कर लेना चाहिए।  Geeken Chemicals India Limited  भारत में सबसे अधिक उर्वरक बेचने वाली कंपनी में से एक है।

 बुवाई का समय (Time of sowing)

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गेंहूँ रबी की फसल है जिसे शीतकालीन मौसम में उगाया जाता है। भारत के विभिन्न भागो  में गेहूं का जीवन काल भिन्न-भिन्न रहता है  सामान्य तौर पर गेहूं की बोआई अक्टूबर से दिसंबर तक की जाती है तथा फसल की कटाई फरवरी से मई तक की जाती है। जिन किस्मों की अवधि 135-140 दिन है, उनको नवम्बर के प्रथम पखवाड़े  में व जो किस्में पकने में 120 दिन का समय लेती है, उन्हे 15-30 नवम्बर तक बोना चाहिए।

 गेहू में लगने वाले रोग और उनका रोकथाम 

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किसी फसल में बीज, सिंचाई, उर्वरक के अलावा रोग तथा कीट की समुचित व्यवस्था करना जरुरी रहता है। गेहूं की फसल में लगने वाले रोग पर्ण झुलसा, लूज़ स्मट, उकठा रोग और गेरुआ रोग नुकसान इतना होता है की पूरी फसल ही खत्म हो जाती है। गेहूं की फसल के ये प्रमुख रोग है। जिसकी वजह से पैदावार में भारी कमी आती है, अतः इसकी पहचान और उपाय जानने आवश्यक है।

 पर्ण झुलसा रोग के लक्षण (Symptom Leaf blight disease)

इस रोग के लक्षण पौधे के सभी भागों में पाये जाते हैं तथा पत्तियों पर इसका प्रभाव बहुत अधिक देखने को मिलता है। शुरू में इस रोग के लक्षण भूरे रंग के नाव के आकार के छोटे धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं जो कि बड़े होकर पत्तियों के पूरे भाग को झुलसा देते हैं तथा इसके कारण ऊतक मर जाते हैं और हरा रंग नष्ट हो जाता है. इससे प्रकाश संश्लेषण बुरी तरह प्रभावित होता है। प्रभावित पौधे के बीजो में अंकुरण क्षमता कम होती है।

 गेहूं में उकठा रोग के लक्षण (Symptom Wilt disease)

गेहूं की फसल में यह रोग एक जीवाणु एवं कवक जनित रोग है जो फसल को काफी नुकसान पहुँचाता है। बैक्टीरियल विल्ट संक्रमण के लक्षण संक्रमित पौधों के सभी भागों पर देखे जा सकते हैं।  इसके कारण पत्तियां पीली हो जाती हैं। आगे चलकर पूरा पौधा सूख जाता है और मर जाता है। इसके कारण गेहूं की फसल खेत में गोल घेरे में सूखना शुरू हो जाती है।  Geeken Chemicals India Limited  भारत में सबसे अधिक उर्वरक बेचने वाली कंपनी में से एक है।

 गेहूं में गेरुआ रोग के लक्षण (Symptom Rust disease)

गेहूं की फसल में लगने वाले गेरुआ रोग (Rust) तीन प्रकार का पीला गेरुआ, काला गेरुआ, भूरा गेरुआ होता है। गेरुआ रोग के कारण पीले, काले एवं भूरे रंग का पाउडर पत्तियों पर जमा हो जाता है। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट होती है वैसे-वैसे इस रोग का प्रकोप बढ़ता जाता है. पाउडर जमा होने के कारण पत्तियों की भोजन बनाने की क्षमता बहुत प्रभावित होती है. जिसके कारण बाद में पत्तियां सूखने लगती है जिसके कारण उत्पादन बहुत ज्यादा प्रभावित होता है।

 गेहू को रोगों से बचाने के उपाय और तरीके 

आप गेहूं में लगने वाले रोगों को आसानी से बचा सकते है। क्योंकि किसान भाइयों का साथी GEEKEN CHEMICALS जो साथ है। लगातार किसानों की पैदावार बढ़ाने के लिए, खेतों में फ़ैल रह खरपतवार को नष्ट करने के लिए , साथ ही फसलों में लगने वाले रोगों के रोकथाम के लिए GEEKEN CHEMICALS लगातार अलग – अलग तरह के रासायनिक उर्वरक बनाता आ रहा है।  अगर हमारे किसान भाई ने गेहूं की खेती की है और उसमें इस तरह के रोग है तो आप किसी भी रासायनिक उर्वरक बेचने वाली दुकान पर जाकर Gee Super (Sulphur 80% WDG) प्रयोग कर सकते है।

 GEE SUPER (SULPHUR 80 %WDG ) का प्रयोग 

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GEE SUPER सल्फर एक एसा खाद है जिसका उपयोग कई कामों के लिए किया जाता है | दुसरे सभी खाद केवल मिटटी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रयोग किये जाते है लेकिन सल्फर मिट्टी की उर्वरा शक्ति के साथ–साथ कीटनाशक, पौधों के लिए टॉनिक का काम भी करता है | किसान भाई अगर आप की फसल के पत्तों का रंग पीला हो रहा हो और आपने कई तरह के रासायनिक उर्वरक का प्रयोग कर लिया है तो आप सल्फर का प्रयोग कर सकते है।  अगर पौधों का विकास नहीं हो रहा हो तो आप के खेत की मिट्टी में सल्फर की कमी है तथा आप के फसल को सल्फर की जरूरत है | सल्फर के कमी से पौधों का हरापन कम हो जाता है, पौधों का विकास रुक जाता है जिसके कारण पौधों में फूल तथा फल कम लगता है | जिससे उत्पादन पर असर पड़ता है |

इसलिए किसान भाइयों को अपने फसल को लेकर चिंतित होने की जरुरत नहीं आप आसानी से इसका प्रयोग कर अपने फसल की उत्पादक क्षमता को बढ़ा सकते है।  Geeken Chemicals India Limited  भारत में सबसे अधिक उर्वरक बेचने वाली कंपनी में से एक है।

 GEE SUPER (Sulphur 80% WDG) कहाँ से ख़रीदे 

किसान भाइयों की सुविधा के लिए हमारा यह उर्वरक भारत के सभी स्टोर में उपलब्ध है आप आसानी से जाकर इसे खरीद सकते है।  GEE SUPER अलग – अलग तरह के पैक में उपलब्ध है।  जो आपको आसानी से उपलब्ध हो जायेगा।

 निष्कर्ष 

आपने यहाँ गेहू की खेती कैसे करें और गेहू की फसल में लगने वाले रोग और उनके उपचार के बारें में जाना। आशा है किसान भाइयों  को हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा।  हम आपके लिए इसी तरह के खेती किसानी , उर्वरक , खेतों और फसलों में लगने वाले कीड़ों से बचने के उपाय के बारें में जानकारी लातें रहेंगे। आप किसी भी तरह की अन्य जानकारी के लिए हमारे दिल्ली स्थित दफ्तर में भी आ सकते है। Geeken Chemicals India Limited  भारत में सबसे अधिक उर्वरक बेचने वाली कंपनी में से एक है।