आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है। गरीब हो या आमिर हर किसी को आलू से बनी हुई चीजें पसंद है। वह चाहे आलू का पापड़ हो या फिर आलू की सब्जी। किसान भाइयों आलू का उत्पादन ज्यादातर रबी के समय किया जाता है। आपको बता दें कि सभी फसलों में आलू की उपज क्षमता सबसे ज्यादा और अच्छी है। अगर हम भारत की बात करें तो आलू की सबसे अच्छी खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश राज्यों में की जाती है। इसकी पैदावार काफी अच्छी होती है इसलिए इसे फायदे की सब्जी के रूप में गिनते है। इसकी खेती करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते है।

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक आलू में सबसे अच्छा पोषण तत्व भी पाया जाता है। आलू में 14 प्रतिशत स्टार्च, 2 प्रतिशत शक्कर, 2 प्रतिशत प्रोटीन और 1 प्रतिशत खनिज लवण की मात्रा होती है। आज के समय में बाजार में आलू की मांग काफी ज्यादा है। बड़ी – बड़ी कंपनियां आलू को खरीदकर चिप्स – पापड़ बनाने का काम कर रही है। इसलिए किसान आज के समय में आलू की खेती करके अच्छा पैसा कमा सकते है।

आप यह लेख GEEKEN CHEMICALS के द्वारा पढ़ रहें है। हम भारत में कई वर्षों से फसलों की अधिक पैदावार और उसमें लगे रोग के रोकथाम के लिए अलग – अलग तरह के केमिकल्स बना रहें है। भारत के किसान जीकेन केमिकल का प्रयोग करके अपने फसल की उत्पादन क्षमता को बढ़ा रहें है , साथ ही उसमें रोगों को लगने से भी बचा रहें है। आप GEEKEN CHEMICALS से जुड़े किसी भी प्रोडेक्ट को आसानी से अपने नजदीकी स्टोर से खरीद सकते है।

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आलू की फसल के लिए जलवायु और मिट्टी का चुनाव

दोस्तों आलू की खेती सबसे ज्यादा मध्यिम शीत के समय की जाती है। भारत में उचित जलवायु के उपलब्धता के अनुसार इसकी खेती पूरे साल की जाती है। वहीं आलू के तापमान की बात करें तो इसके लिए 15-25 डिग्री सेल्सियस का तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसकी खेती किसान अक्टूबर महीने से लेकर नवंबर तक कर सकते है। आलू की फसल के लिए लम्बी रातें और अच्छी धुप सबसे ज्यादा लाभकारी होती है। इस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान कम धूप, ज्यादा आर्द्रता एवं वर्षा से होती है। इसकी वजह से आलू में बैक्टीरिया एवं फफूंद रोग भी फैलता है।

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आलू की खेती के लिए कार्बनिक तत्व से भरपूर उपजाऊ मिटटी होनी चाहिए। किसान अगर आलू की खेती के लिए मिट्टी का चुनाव कर रहें है तो इसके लिए सबसे अच्छी बलुई दोमट मिट्टी मानी जाती है। आलू की खेती के लिए अगर पीएच मान की बात किया जाये तो इसके लिए सामान्य पीएच मान सबसे अच्छा होता है। भारत में ज्यादातर आलू की खेती ठण्ड के मौसम में की जाती है लेकिन ठंड में गिरने वाला पाला इसे बहुत नुकसान पहुंचाता है। किसान भाइयों आलू की फसल के लिए गर्म जलवायु सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। जिसकी वजह से आलू की फसल को हल्के बरसात की भी जरुरत पड़ती है।

कैसे करें आलू के खरपतवार को खत्म

आलू के खरपतवार को किसान भाई रासायनिक और प्राकृतिक दोनों ही विधियों से खत्म कर सकते है। इसके खरपतवार को खत्म करने के लिए जरुरी है कि आप समय – समय पर इसकी निराई – गुड़ाई करते रहें। इसकी पहली गुड़ाई बीज रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद करनी चाहिए। आलू की फसल को 2 -3 गुड़ाई की जरुरत पड़ती है। ऐसा करने पर आलू की फसल में खरपतवार कम मात्रा में जन्म लेते है। इसके अलावा आप इसके खरपतवार को खत्म करने के लिए जीकेन केमिकल्स का बना हुआ खरपतवार नाशी Vincare(Paraquate Dichloride 24% SL) प्रोडेक्ट का प्रयोग भी कर सकते है। यह खरपतवार को खत्म करने में काफी असरदार है। इसे आप ऑनलाइन या फिर ऑफलाइन दोनों तरीके से खरीद सकते है।

आलू के फसल में लगने वाले प्रमुख कीट व रोग नियंत्रण

किसान भाइयों सभी फसलों की तरह आलू पर भी कई रोगों का प्रकोप होता है। आलू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान लाही कीट से होता है। यह कीट आलू के पौधे में रस चूसने का काम करता है, जिसकी वजह से आलू की पत्तियां नीचे की तरफ घूम जाती है। यह कीट विषाणु रोग भी फैलते है। इस तरह के किट से आलू की फसल को बचानें के लिए आप GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें कीटनाशक का प्रयोग आसानी से कर सकते है। GEEKEN CHEMICALS लाही कीट को खत्म करने के लिए लेकर आया है Mancozeb (64% + Metalaxyl 8% WP.)जो बहुत जल्द इन कीड़ों को खत्म करता है और आलू की पैदावार को बढ़ाता है।

अगेती अंगमारी

यह रोग ज्यादातर जब आलू का पौधा बड़ा होने लगता है तभी लगते है। यह रोग आलू के पौधे में नीचे से ऊपर की तरफ बढ़ता है। यह रोग सबसे पहले आलू की पत्तियों को सुखाता है, जिसके बाद पूरी फसल को खत्म कर देता है। इस रोग की अगर पहचान किया जाये तो यह आलू की पत्तियों में नीचे की तरफ भूरे रंग के धब्बे के रूप में दिखाई पड़ता है। इस रोग से बचाव के लिए आप GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है। GEEKEN CHEMICALS BEST Pesticides Manufacturers in INDIA कंपनी में से है। अगेती अंगमारी के कीट को खत्म करने के आप Gee Furo (Carbofuran 3% CG) प्रयोग कर सकते है।

ब्लैक स्कर्फ

यह रोग भी आलू की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। यह रोग ज्यादातर अंकुरण के समय लगता है। इस रोग के कारण आलू के पौधे काले धब्बे के रूप में नजर आते है। जब भी रोग का आक्रमण ज्यादा होता है यह आलू की पूरी फसल को प्रभावित कर देते है। इससे किसान भाइयों की फसल कम पैदा होती है , जिससे उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ता है। आप ब्लैक स्कर्फ रोग को खत्म करने के लिए GEEKEN CHEMICALS के कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है। यह कैमिकल बाजार में आसानी से उपलब्ध है। इस तरह के रोगों को खत्म करने के लिए आप Mancozeb (64% + Metalaxyl 8% WP.) का प्रयोग कर सकते है।

कटुआ कीट

कटुआ कीट भी बहुत हानिकारक कीट होता है। यह कीट पौधों की सतह पर जाकर आक्रमण करते है जिससे पूरी फसल नष्ट हो जाती है। कटुआ कीट ज्यादातर आलू की फसल को रात में नुकसान पहुंचाता है। किसान पहले तो इस कीट के बारें में जान नहीं पातें , जिसकी वजह से उनकी पूरी फसल नष्ट होने लगती है। अगर आपके आलू की फसल में इस तरह का रोग दिखाई पड़ रहा है तो आपको तुरंत अपने नजदीकी स्टोर पर जाकर GEEKEN CHEMICALS के द्वारा बनें कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए। GEEKEN CHEMICALS BEST Pesticides Manufacturers in INDIA कंपनी में से है। कटुआ रोग को खत्म करने के लिए आप Elentra (Mancozeb 64% + Metalaxyl 8% WP) और Bonanza (Thiophanate Methyl 70% WP) का प्रयोग कर सकते है। जो बहुत जल्द काम करना शुरू करता है जिसकी वजह से आलू में लगने वालें कटुआ रोग खत्म हो जाते है।

फलों का हरा होना

यह रोग ज्यादातर अधिक तापमान के कारण आलू के कंद के उखड़ जानें के बाद देखने को मिलता है। इस रोग से प्रभावित आलू की फसल हरे रंग की दिखाई देने लगती है। इस तरह की समस्या से बचने के लिए किसान भाई आलू के कांड को मिट्टी से ढक सकते है। तापमान अधिक होने पर खेत में नमी बनाये रखने के लिए आप सिंचाई कर सकते है।

पाला से आलू की फसल का बचाव

आलू की खेती देरी से करने पर इसमें कई तरह के रोग , खरपतवार , के आलावा का प्रभाव भी देखने को मिलता है। अगेती फसल की खुदाई जनवरी के महीने में किसान कर लेते है। इसलिए इसपर पाला का ज्यादा प्रभाव नहीं दिखाई पड़ता है। पछेती खेती करने पर दिसम्बर और जनवरी माह में अधिक ठण्ड होने पर पाले की समस्या बनी रहती है इसके लिए किसान भाइयों को समय – समय पर फसल की सिचाई करनी चाहिए। अगर जमीन गीली है तो पाले का असर भी कम होता है।

कृषि एक्सपर्ट बताते है कि अगर किसान अपनी फसल को पाले से बचा लेते है तो इसकी पैदावार भी अच्छी होती है।

कब करें आलू की खुदाई

किसान अगर आलू की अगेती खेती करते है तो इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते है। आलू को बुवाई के 70 -80 दिनों के बाद खुदाई कर देनी चाहिए। आलू की खुदाई के लिए सबसे उत्तम समय फरवरी से मार्च का माना गया है। कृषि एक्सपर्ट की मानें तो इसकी खुदाई केलिए वतावरण का 30 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान होना जरुरी है। इसके साथ – साथ आलू की खुदाई के बाद इसका भंडारण करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसलिए किसान को आलू के भंडारण की व्यवस्था भी पहले ही कर लेनी चाहिए। जिससे आलू सड़ न सकें।

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निष्कर्ष

आपने यहाँ जाना की आलू की खेती कैसे करते है और इसे रोग लगने से कैसे बचाया जा सकता है। आशा है किसान भाइयों को हमारी यह ब्लॉग पसंद आई होगी। आप इसी तरह से अपने खेती – किसानी से जुडी किसी भी जानकारी के लिए GEEKEN CHEMICALS के ब्लॉग को पढ़ते रहें। किसान भाइयों आप इस जानकारी को अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को भी शेयर कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे दिल्ली स्थित ऑफिस भी आ सकते है। अगर आप हमारे कीटनाशक को खरीदना चाहते है तो इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से खरीद सकते है। इसके अलावा आप हमें (+91 – 9999570297) पर कॉल कर अपने फसल के मुताबिक दवाई को मंगा सकते है।